
इटली मूल के डॉ टैस्सीटोरी भारतीय आत्मा थे
बीकानेर. इटली मूल के राजस्थानी भाषा विद्वान डॉ. लुईजि पिऔ टैस्सीटोरी की 135वीं जयंती पर उनकी समाधि स्थल पर मंगलवार को पुष्पांजलि कार्यक्रम हुआ। राजस्थानी को दूसरी राजभाषा बनाने एवं संवैधानिक मान्यता के साथ-साथ टैस्सीटोरी स्थल को विकसित करने बाबत प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा ने कहा कि टैस्सीटोरी असल में भारतीय आत्मा थे। उनकी कर्म-स्थली बीकाणा शहर रही। वे भाषाविद् एवं उच्च स्तर के पुरातत्वविद् तो थे ही, साथ ही राजस्थानी भाषा मान्यता के प्रबल समर्थक रहे हैं। ऐसी स्थिति में राजस्थानी भाषा को प्रदेश सरकार दूसरी राजभाषा बना कर एवं केन्द्र सरकार संवैधानिक मान्यता प्रदान कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दे सकती है। मुख्य अतिथि कर्नल हेम सिंह शेखावत ने कहा कि डॉ टैस्सीटोरी के द्वारा दी गई राजस्थानी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। विशिष्टि अतिथि वरिष्ठ कवयित्री मधुरिमा सिंह ने कहा कि डॉ टैस्सीटोरी स्थल समाधि को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक कासिम बीकानेरी ने कहा कि उन्होंने राजस्थानी को मान्यता के लिए अलख जगाई।प्रज्ञालय संस्थान के राजेश रंगा ने आभार ज्ञापित किया।
सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टिट्यूट के तत्वावधान में म्यूजियम परिसर स्थित एल.पी. टैस्सिटोरी की प्रतिमा स्थल पर कार्यक्रम हुआ । कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि टैस्सिटोरी को "वेलि क्रिसन रुक्मणी री" और "छन्द राव जैतसी रो" नामक दो डिंगल भाषा के काव्यों को संपादित करके साहित्य जगत में प्रकाशित करने का श्रेय जाता है। मुख्य अतिथि निर्मल कुमार शर्मा, साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार, विशिष्ट अतिथि डॉ. रेणुका व्यास डॉ. रामलाल पडिहार एवं एनडी रंगा ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में चंद्रशेखर जोशी, रमेश महर्षि , जुगल पुरोहित, शिव दाधीच, बी.एल.नवीन, संजय जनागल, नागेश्वर जोशी, नासिर जैदी, योगेंद्र पुरोहित, प्रेम नारायण व्यास, शिवशंकर शर्मा आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की।
Published on:
13 Dec 2022 09:56 pm
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