
तो फिर हत्यारे कौन?
अमित वाजपेयी
15 साल पहले जयपुर बम ब्लास्ट से दिल छलनी हुआ था। आज उस जख्म पर फिर कील ठुकी है। समझ नहीं आ रहा आतंकी हमले से ज्यादा दुखी था या आज ज्यादा विचलित हूं। क्योंकि जिन लोगों को आतंकी मानकर अब उनकी फांसी का इंतजार हो रहा था, वे सब तो आज बरी हो गए।
जिन साक्ष्य और दलील के आधार पर उन्हें जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत ने करीब सवा तीन साल पहले फांसी सुनाई थी, हाईकोर्ट ने उन्हीं आधारों की पुन: विवेचना की तो आरोप साबित नहीं हो सके। नतीजतन सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
अब सवाल यह उठता है कि फिर सिलसिलेवार 8 बम ब्लास्ट में जान गंवाने वाले 71 लोगों के हत्यारे कौन हैं? उन्हें कब पकड़ा जाएगा और कब 71 आत्माओं को शांति और परिजन को न्याय मिलेगा? ब्लास्ट हुआ... आरोपी पकड़े... अदालत में दलीलें रखीं... और फिर फांसी की सजा सुनाई, यह सब सच है तो फिर झूठ क्या है? झूठ है, उन मृतकों के परिजन और 185 लोगों को अब तक दी गई दिलासा किएक न एक दिन उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।
बीते 15 साल से उन्हें बस न्याय के नाम पर हर बार नई तारीख मिलती रही। अब तो न्याय मिलने की उस तारीख ने भी साथ छोड़ दिया। क्योंकि हाईकोर्ट ने कह दिया कि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों का दोष सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस अनुसंधान पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि इसी अनुसंधान के आधार पर विशेष अदालत पहले फांसी की सजा सुना चुकी है।
क्या यह माना जाए कि पुलिस ने आतंकी हमले के अनुसंधान में भी फौरी तफ्तीश के अपने रवैए को बरकरार रखा। बिना ठोस आधार के कुछ लोगों को पकड़कर सलाखों के पीछे कैद कर दिया। अपराध में परिस्थितिजन्य साक्ष्य बड़ी चीज है। क्या अनुसंधान में बम ब्लास्ट से मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान का लिंक स्थापित करने में पुलिस ने सावधानी नहीं बरती। या यह माना जाए कि अभियोजन पक्ष हाईकोर्ट में उस दमदारी के साथ तर्क और साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिसके आधार पर न्यायाधीश सभी आरोपियों को दोषी मान सकें। मतलब 15 साल बाद भी हत्यारे आजाद हैं।
सभ्य समाज पर इससे बड़ा आतंकी हमला कोई और नहीं हो सकता। अब इस आतंकी हमले का जिम्मेदार कौन है? जिसकी वजह से अब तक जयपुर ब्लास्ट के आरोपी आजाद हैं। उस एजेंसी और उस शख्स को समाज के सामने पेश करना बेहद जरूरी है। साथ ही उसे ऐसी सख्त सजा भी जरूरी है कि ऐसे गंभीर मामलों में लापरवाही करने से पहले कोई भी सौ दफा कांप जाए।
अब कोर्ट और पुलिस के शीर्ष अफसरों का दायित्व है कि इस सवाल का जवाब आतंकी हमलों की फाइलों में दफन न रह जाए। आतंकी हमलों की फाइल को फिर तत्काल खोला जाए। विशेष अनुसंधान एवं अभियोजन टीम बनाकर जयपुर ब्लास्ट के असल आरोपियों को पकड़कर उन्हें अंजाम तक पहुंचाया जाए।
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