
Jammu Kashmir : केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक जवाहर सुरंग का नवीनीकरण का कार्य अब पूरा होने के करीब है। सीमा सड़क संगठन की ओर से निष्पादित परियोजना का उद्देश्य रणनीतिक जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ दशकों पुरानी सुरंग को आधुनिक और कुशल मार्ग में बदलना है। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस, प्रतिष्ठित 2.5 किलोमीटर लंबी जवाहर सुरंग दशकों तक घाटी का एकमात्र प्रवेश द्वार थी।

Jammu Kashmir : वर्ष 1954 में मूल रूप से एक जर्मन इंजीनियरिंग फर्म की ओर से निर्मित जवाहर सुरंग का नाम देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर रखा गया था। 2022 तक कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग था। हालांकि जवाहर सुरंग विशिष्ट वाहनों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

Jammu Kashmir : साल 2010 के बाद नवीनीकरण कार्य आवश्यक महसूस किया गया क्योंकि सुरंग की दोनों नलियों में बड़े पैमाने पर रिसाव की समस्या थी जिससे सड़क की सतह खराब हो गई थी।

Jammu Kashmir : जुलाई 2023 में शुरू किया गया नवीनीकरण 62.50 करोड़ की लागत से रिकॉर्ड 18 महीनों के भीतर पूरा हो गया। बीआरओ जवाहर सुरंग के निर्माण और रखरखाव की देखभाल करता है। सुरंग की दोनों पुनर्निर्मित ट्यूब पूर्वी और पश्चिमी नाम से यातायात के लिए खोली जाएंगी।

पीर पंजाल रेंज में बनिहाल दर्रे के पास 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ऐतिहासिक सुरंग जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर सकती है।