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रोजगार व विकास से दूर जवाहर सागर के ग्रामीण

उपतहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत जवाहर सागर में रोजगार का एक मात्र साधन मनरेगा है। यहां के ग्रामीण मनरेगा में काम कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है।

बूंदीJun 21, 2024 / 05:48 pm

पंकज जोशी

रोजगार व विकास से दूर जवाहर सागर के ग्रामीण

डाबी. जवाहर सागर का सूना पड़ा बाजार।

डाबी. उपतहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत जवाहर सागर में रोजगार का एक मात्र साधन मनरेगा है। यहां के ग्रामीण मनरेगा में काम कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है। पिछले कई वर्षों से ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत कार्य करवाए जाते रहे है। पिछले दिनों वन विभाग के एक आदेश के चलते अब ग्रामीणों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। अब ग्रामीणों को रोजगार के लिए दूर दराज जाने को मजबूर होना पड़ेगा। 16 जून को डाबी के क्षेत्रीय वन अधिकारी हेमराज सिंह ने डाबी रेंज के अधीन वन क्षेत्र में मनरेगा से सम्बंधित एवं कोई भी गैर वानिकी कार्य बिना स्वीकृति के नहीं करने का आदेश जारी कर दिया, जिस पर विकास अधिकारी तालेड़ा ने संबंधित सभी ग्राम विकास अधिकारियों को बिना वन विभाग की स्वीकृति के कार्य आरंभ नहीं करने को लेकर पाबंद कर दिया।
पहले भी बन चुकी बिना स्वीकृति के सड़क
डाबी रेंज के वनखण्ड रामपुरिया में वन विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर बिना किसी अनुमति के सीसी सड़क का निर्माण करवा दिया था। मामला उजागर होने के बाद अधिकारी लीपापोती में जुटे रहे। मामले में आनन फानन में वन विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम के तहत संवेदक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
यह आ रही समस्या
ग्राम जवाहर सागर मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व की जद में बसा हुआ है। ऐसे में न कोई विकास कार्य हो पा रहे थे और न ही कोई मकान निर्माण करा सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को केन्द्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। रोजगार के कोई साधन मुहैया नहीं है। गृह जिले से सम्पर्क सड़क नहीं है। पेयजल आपूर्ति के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं है। ग्राम पंचायत में नरेगा के अलावा किसी प्रकार के विकास कार्य नहीं हो पाते। नवीन राशनकार्ड बनाने पर भी प्रतिबंध है।
गांव विस्थापित हो, तो हो समस्या का समाधान
ग्राम जवाहर सागर को विस्थापित किया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में गांव में 352 परिवार निवास कर रहे है। गांव की कुल आबादी 1542 है। कुल आबादी में से 859 मतदाता मतदाता है। ग्राम पंचायत द्वारा 284 जॉब कार्ड जारी किए हुए है। आबादी को करौंदी गांव में विस्थापित करने के लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2015 में सरकार को भूमि आवंटन के प्रस्ताव भेजे थे। मंजूरी के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर ने 5 फरवरी 2016 को ग्राम करौंदी में 140 बीघा भूमि आवंटित कर दी थी। विस्थापन की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी कि वन विभाग ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर करौंदी में आवंटित भूमि को वन क्षेत्र में बताते हुए वहां पर आबादी विस्थापित व अन्य कार्यों पर रोक लगा दी थी। ऐसे में समूची प्रक्रिया ठप हो गई थी।

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