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जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी ने लोगों की आपत्ति पर रोका नजरबाग को ध्वस्त करने का काम

स्वाधीनता संग्राम के समय मध्यप्रदेश आगमन पर गांधीजी ने यहां किया था रात्रि विश्राम

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सागर

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Sanjay Sharma

Jan 18, 2020

जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी ने लोगों की आपत्ति पर रोका नजरबाग को ध्वस्त करने का काम

जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी ने लोगों की आपत्ति पर रोका नजरबाग को ध्वस्त करने का काम

सागर. जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी द्वारा ऐतिहासिक इमारत नजरबाग को धराशायी करने भेजी गई मशीनों को लोगों के विरोध के चलते रोक दिया गया। अकादमी के मुख्य द्वार के नजदीक 1750 ईसवी की इस महत्वपूर्ण इमारत में महात्मा गांधी ने भी 1933 में रात्रि विश्राम किया था। इस वजह से इस इमारत का महत्व और बढ़ जाता है। शुक्रवार को कई दशकों से क्षतिग्रस्त और जर्जर इस इमारत को ध्वस्त करने के लिए जैसे ही अकादमी प्रबंधन द्वारा मशीनों को भेजा गया लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। कुछ प्रबुद्ध लोग भी मौके पर पहुंचे और ऐतिहासिक महत्व की इमारत को टूटनेने बचाने मुख्यमंत्री कमलनाथ और कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक तक खबर पहुंचा दी। इमारत का इतिहास और नजरबाग से महात्मा गांधी व स्वाधीनता आंदोलन की यादों का जुड़ाव सामने आते ही अधिकारी हरकत में आए और चंद मिनटों में ही पुलिस अकादमी प्रबंधन द्वारा मशीनों को रोक दिया गया। यानि दशकों से देखरेख के बिना खण्डहर हो चली इस इमारत के दिन बुहरने की उम्मीद लगाई जा रही

1971 में हुई थी क्षतिग्रस्त -

राजा ऊदनशाह के किले के नजदीक ही मराठा काल में 1750 इसवी में लाखा बंजारा झील के उत्तरी छोर पर नजरबाग का निर्माण कराया गया था। नजरबाग बेजोड़ इमारत के बीच बगीचा था जिसकी खूबसूरती झील से सटे होने से और भी ज्यादा थी। किले के बाहर इस इमारत ओर उद्यान के महत्व को देखते हुए इसे संरक्षित रखा गया था। नजरबाग की दीवारों पर मराठाकाल की कला और नक्काशी भी थी लेकिन समय के साथ यह सब धुंधली और क्षतिग्रस्त हो गई थी। बताया जाता है कि 1971 में नजरबाग का एक हिस्सा ढह गया था और तब देखरेख न होने से धीरे-धीरे यह पूरी इमारत ही खण्डहर में बदल गई।

उपयोगी बनाने की कवायद -

खण्डहर होते जा रहे नजरबाग की जमीन को उपयोगी बनाने के लिए हाल ही में जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी द्वारा प्लान तैयार किया गया है। परिसर में जगह की कमी को देखते हुए अकादमी निदेशक एडीजी जी.जनार्दन खण्डहर हिस्से को तोड़कर उसकी जगह नया निर्माण कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने प्रस्ताव तैयार कर खण्डहर इमारत को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन जैसे ही मशीनें नजर बाग को जमीदोज करने पहुंची लोगों ने उन्हें रुकवा दिया। लोगों द्वारा इसकी खबर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के संयोजक व प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता को दी गई। कुछ लोगों ने कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक को भी इससे अवगत कराया। अधिकारियों को जैसे ही मालूम चला कि जिस नजर बाग पर मशीनें चल रही हैं वहां स्वाधीनता आंदोलन के समय गांधीजी ने रात गुजारी थी पूरा अमला हरकत में आ गया और काम रुकवा दिया गया।

जीर्णोद्धार की प्लानिंग पर चर्चा -

पुलिस अकादमी निदेशक एडीजी जी.जनार्दन का कहना है कि यह हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और कभी भी ढह सकता है। परिसर में जगह कम है और इसलिए कई दशकों से अनुपयोगी और खण्डहर हो चुके भवन के क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर उसे उपयोग में लेना चाहते थे। लोगों ने इसके महत्व को बताया है जिसके चलते काम रोक दिया गया है। यदि प्रशासनिक स्तर पर इसके जीर्णोद्धार को लेकर कोई बात बनती है तो इस पर विचार करेंगे।