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और ये जगा गए… घाटी काटकर लाल लंगोट वाले बाबा ने बना दी सड़क, गांवों की दूरी 40 किमी घटा दी

यहां कभी लोगों का पैदल चलना मुश्किल था, आज यहां वाहन फर्राटा भर रहे हैं... और इसकी वजह हैं गेण्डोली के महंत बजरंग दास (लाल लंगोट वाले बाबा)। वे स्वयं अब यह देखने के लिए जीवित नहीं हैं, लेकिन उनका का सपना साकार हो गया है।

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बूंदी/मांडपुर घाटी/पत्रिका न्यूज नेटवर्क। यहां कभी लोगों का पैदल चलना मुश्किल था, आज यहां वाहन फर्राटा भर रहे हैं... और इसकी वजह हैं गेण्डोली के महंत बजरंग दास (लाल लंगोट वाले बाबा)। वे स्वयं अब यह देखने के लिए जीवित नहीं हैं, लेकिन उनका का सपना साकार हो गया है। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1982 में महंत बजरंग दास घाटी के पास मांडपुर स्थित राधाकृष्ण आश्रम में तपस्या करते थे।

उसी दौरान एक जना मांडपुर की ओर से घोड़ी लेकर घाटी के रास्ते से गेण्डोली की ओर जा रहा था। लेकिन उसकी घोड़ी घाटी में गिरकर मर गई। संत भी वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने घोड़ी वाले का विलाप देख प्रण किया इस घाटी पर रास्ता बनाएंगे और इस काम में जुट गए। शुरुआत जनसहयोग से की, जनप्रतिनिधियों से भी काम करवाया। महंत द्वारा घाटी काटकर रास्ता बनाने से नैनवां और केशवरायपाटन तहसील के गांवों की दूरी 30-40 किमी घट गई।

घाटी पर मांडपुर की ओर ग्रामीणों द्वारा जन सहयोग से सीसी रोड बना दी गई है और गेण्डोली की ओर झींकरा व ग्रेवल डाल समतल रास्ता बनाया गया है, जिससे आवागमन में परेशानी नहीं होती। घाटी का एक छोर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य क्षेत्र में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभयारण्य का एक द्वार माण्डपुर में प्रस्तावित है। घाटी में वन विभाग पक्की सड़क बना दे, तो अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों को सुविधा होगी।

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