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BIRTHDAY SPECILA: निम्मी, पचास के दशक की दमदार अदाकारा 

18 फरवरी को आगरा में जन्मी निम्मी 50 के दशक की ऐसी अदाकारा थीं, जिनकी खूबसूरती और अभिनय का डंका बजता था...

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Dilip Chaturvedi

Feb 18, 2016

nimmi

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मुम्बई। बॉलीवुड में निम्मी को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है, जिन्होंने पचास और साठ के दशक में महज शो पीस के तौर पर अभिनेत्रियों को इस्तेमाल किए जाने जाने की विचारधारा को बदल दिया। बरसात, दीदार, आन, उडऩ खटोला और बसंत बहार जैसी कई फिल्मों में निम्मी ने अपने अविस्मरणीय अभिनय से अपनी अमिट छाप छोड़ी। निम्मी अभिनीत फिल्मों पर यदि एक नजर डालें, तो पाएंगे कि पर्दे पर वह जो कुछ भी करती थीं, वह उनके द्वारा निर्भा गई भूमिका का जरूरी हिस्सा लगता है और उसमें वह कभी भी गलत नहीं होती थीं।

निम्मी का जन्म 18 फरवरी 1933 को आगरा में हुआ था। उनका मूल नाम नवाब बानू था। उनकी मां वहीदन मशहूर गायिका होने के साथ फिल्म अभिनेत्री भी थीं और उन्होंने मशहूर निर्माता निर्देशक महबूब खान के साथ कुछ ऊिल्मों काम किया था। निम्मी के पिता मिलिट्री में कॉन्ट्रेक्टर के तौर पर काम करते थे। निम्मी जब महज नौ साल की थीं, तब उनकी मां का देहांत हो गया। इसके बाद वह अपनी दादी के साथ रहने लगीं। भारत विभाजन के पश्चात निम्मी मुंबई आ गईं। इसी दौरान उनकी मुलाकात निर्माता- निर्देशक महबूब खान से हुई। महबूब खान इससे पहले उनकी मां को लेकर कुछ फिल्मों का निर्माण कर चुके थे। वह उन दिनों अपनी नई फिल्म अंदाज का निर्माण कर रहे थे। उन्होंने निम्मी को फिल्म स्टूडियो मे बुलाया।

राजकपूर की पसंद बन गईं निम्मी
फिल्म अंदाज के सेट पर निम्मी की मुलाकात अभिनेता राजकपूर से हुई, जो उन दिनों अपनी नई फिल्म बरसात के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे और मुख्य अभिनेत्री के लिए नरगिस का चयन कर चुके थे। राजकपूर ने निम्मी की सुंदरता से प्रभावित होकर उनके सामने इस फिल्म में सहायक अभिनेत्री के रूप में काम करने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म बरसात की सफलता के बाद अभिनेत्री निम्मी फिल्म इंडस्ट्री में रातों-रात अपनी पहचान बनाने में सफल हो गईं।

वर्ष1952 में प्रदर्शित फिल्मआन निम्मी के सिने कॅरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। महबूब खान निर्मित इस फिल्म की खास बात यह थी कि यह हिंदुस्तान में बनी पहली टेक्नीकलर फिल्म थी और इसे काफी खर्च के साथ बृहद पैमाने पर बनाया गया था। दिलीप कुमार, प्रेमनाथ और नादिरा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में निम्मी ने अतिथि भूमिका निभाई थी। फिल्म आन से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि भारत में बनी यह पहली फिल्म थी, जो पूरे विश्व में एक साथ प्रदर्शित की गई। पचास के दशक में निम्मी की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन दिनों जब फिल्म की पहली झलक वितरक को दिखाई गई, तो उन्होंने फिल्म निर्माता से निम्मी के रोल को बढ़ाने की मांग की और उनके जोर देने पर निम्मी पर एक ड्रीम सॉन्ग फिल्माया गया, जो श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
हर अभिनेता के साथ चला निम्मी का जादू...
फिल्म आन की सफलता के बाद निम्मी को एक बार फिर से महबूब खान की ही फिल्म अमर में काम करने का अवसर मिला। बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय बनी इस फिल्म में निम्मी के अलावा दिलीप कुमार और मधुबाला की मुख्य निभाई थी। हालांकि फिल्म व्यावसायिक तौर पर सफल नहीं हुई, लेकिन निम्मी के दमदार अभिनय को आज भी सिने दर्शक नहीं भूल पाए हंै। महबूब खान भी इसे अपने सिने कॅरियर की महत्वपूर्ण फिल्म मानते हैं। वर्ष 1954 में निम्मी ने निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और फिल्म डंका का निर्माण किया।

वर्ष 1955 में उन्हें महान निर्माता- निर्देशक सोहराब मोदी की फिल्म कुंदन में काम करने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने मां और बेटी की दोहरी भूमिका निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। निम्मी ने अपने सिने कॅरियर में उस दौर के सभी दिग्गज अभिनेता के साथ अभिनय किया। राजकपूर के साथ भोला-भाला प्यार हो या फिर अशोक कुमार और दिलीप कुमार के साथ संजीदा अभिनय या देवानंद के साथ छैल-छबीला रोमांस निम्मी हर अभिनेता के साथ उसी के रंग में रंग जाती थीं। वर्ष1957 में प्रदर्शित फिल्म भाई-भाई निम्मी के सिने कॅरियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है। इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के से उन्होंने दर्शकों के साथ ही समीक्षकों का भी दिल जीत लिया और उन्हें क्रिटिक्स अवॉड से भी सम्मानित किया गया।

चार दिल चार राहें
पचास के दशक के अंतिम वर्षों में निम्मी को चेतन आंनद की अंजली और विजय भट्ट की बसंत बहार जैसी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। इसी दौरान निम्मी ने ख्वाजा अहमद अब्बास की विवादास्पद फिल्म चार दिल चार राहें में भी काम करने का अवसर मिला, जिसमें उनके अभिनय को जबरदस्त सराहना मिली। इसके बाद निम्मी बहुत सोच समझकर फिल्मों को चुनने लगीं और कम से कम फिल्मों में अभिनय करने लगीं। उन्होंने बी.आर.चोपड़ा की फिल्म साधना और वो कौन थी में काम करने से मना कर दिया। यह अलग बात है कि बाद में दोनों फिल्मे टिकट खिड़की पर सफल हुई।

वर्ष 1963 में प्रदर्शित फिल्म मेरे महबूब निम्मी के सिने कॅरियर की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। अशोक कुमार-राजेन्द्र कुमार और अमीता की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में निम्मी ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया और इसके साथ ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया। वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म आकाश दीप निम्मी के सिने कॅरियर की अंतिम फिल्म साबित हुई । इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया। निम्मी ने अपने चार दशके लंबे कॅरियर में लगभग 50 फिल्मों में अभिनय किया है। निम्मी इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय नहीं हैं।

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