
pagdi museum
पगड़ी आन, बान और शान का प्रतीक मानी जाती है। यह प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की परिचायक है। संस्कृत में पगड़ी को शिरोस्त्राण या शिरोवेश कहा जाता है। राजा, महाराजा, ठाकुरों और नवाबों की पगडिय़ों की विशिष्ट शैली रही है। वहीं, किसान, व्यापारी, पुजारी और चरवाहे की भी पगड़ी की बनावट अलग होती थी।
ऐसी ही विभिन्न वर्गों की विशिष्ट पगडिय़ों का संग्रह है उदयपुर की बागोर की हवेली के पगड़ी संग्रहालय में। इस अलग तरह के संग्रहालय को देखने के लिए कई देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यहां विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी सैलानियों का ध्यान आकर्षित करती है। इसमें तीन राज्यों के किसानों द्वारा पहनी जाने वाली पगड़ी की शैलियों का मिश्रण किया है। यह बाईं ओर से गुजरात, दाईं ओर से मध्यप्रदेश और बीच में राजस्थानी शैली की है।
पगड़ी से होती थी व्यक्ति की पहचान
पुराने समय में नंगे सिर घूमना ठीक नहीं माना जाता था। समाज में पगडिय़ों की विशिष्ट शैली रही है। किसान, व्यापारी, पुजारी और चरवाहे सबकी पगड़ी की बनावट अलग होती थी।
विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी भी है यहां पर
यहां पर दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी भी मौजूद है जिसकी परिधि 11 फीट, लंबाई 151 फीट, ऊंचाई 30 इंच, वजन 30 किलो है।
Published on:
01 Mar 2016 09:45 am
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