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पटना हाईकोर्ट ने रचा इतिहास, महज ढाई घंटों में 300 केसों का किया निपटारा

मुख्य न्यायधीश कार्यभार संभालने के बाद कभी नहीं रहे छुट्‌टी पर...

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patna high court

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नई दिल्ली | कोर्ट-कचहरी के बारे में लोगों में आम धारणा है कि एक बार जो इनमें फंस गया, फिर निकल नहीं पाता। तारीख पर तारीख से केस सालों लंबे खिंचते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि पीढ़ियों तक खिंच जाते हैं। इस पर मशहूर पंजाबी कवि सुरजीत पातर का एक शेर भी है-
इस अदालत 'च बंदे बिरख हो गए, फैसले सुणदेयां सुणदेयां मुक गए।
मतलब कि अदातल के फैसले के इंतजार में आदमी का पूरा जीवन बीत जाता है। किंतु पटना हाईकोर्ट ने इन धारणाओं को तोड़ते हुए फैसले देने में इतिहास रच दिया है। महज साढ़े सात महीने के अंदर हाई कोर्ट में दाखिल 63,070 केसों में से 62,061 मुकदमों का निपटारा कर दिया। एक और रिकॉर्ड पटना के मुख्य न्यायाधीश रविंजन ने भी बनाया। उन्होंने महज ढाई घंटे में 300 केसों का निपटारा किया।

मुख्यन्यायाधीश रविरंजन ने भी बनाया रिकॉर्ड
न्यायाधीश रविरंजन की एकल पीठ में 300 जमानत संबंधी केस थे। इसमें से उन्होंने 289 केस को अंतिम रूप से निपटा दिया। केवल 11 केसों पर वकील के नहीं रहने के कारण फैसला नहीं दिया जा सका। खास बात यह रही कि इन सारे मामलों का निपटारा केवल ढाई घंटे में हो गया। उसके बाद उनकी केस सूची खाली हो गई। बता दें, अभी तक किसी जज की ओर से केसों के निपटारे का आंकड़ा आंकड़ा सवा सौ के आसपास रहा है।

कभी नहीं रहे छुट्‌टी पर
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन ने पटना हाई कोर्ट में 15 मार्च, 2017 को कार्यभार संभाला था। उसके बाद से वे छुट्‌टी पर नहीं रहे। उनके काम करने के जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पटना हाई कोर्ट में काम संभालने के बाद से 30 अक्टूबर, 2017 तक हाई कोर्ट में आए 63,070 केसों में से 62,061 का निपटान कर दिया गया। इसी साल की 13 जुलाई तक 1266 केसों, 21 सितंबर को 1056 और 17 अक्टूबर को 1189 केसों पर फैसला दे दिया गया। हाई कोर्ट में 9 नवंबर को रिकॉर्ड 1489 मुकदमे निपटाए गए। केसों के निपटारे में दूसरा स्थान न्यायाधीश सुधीर सिंह का रहा। उन्होंने कुल 169 केस निपटाए।

किस दिन कितने मुकदमे निपटाए
-13 जुलाई, 2017 - 1266
-21 सितंबर, 2017 -1056
-17 अक्टूबर, 2017 -1189
-9 नवंबर, 2017 -1489

IMAGE CREDIT: google

यूपी के एक जज का है विश्व रिकॉर्ड
इसी साल उत्तर प्रदेश के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज ने मात्र 327 दिनों में 6,065 मामलों को निपटाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। ये जज थे मुजफ्फरनगर के तेजबहादुर सिंह। दरअसल, जब वकीलों की हड़ताल होती, तब भी जज तेजबहादुर सिंह अपने काम करते रहते। 6,065 केस निपटाने के दौरान उन्होंने करीब 903 दम्पत्तियों के बीच सुलह भी कराई। इतने कम समय में इतने केस निपटाने वाले वे पहले भारतीय जज बन गए। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ से भी सिंह का नाम शामिल किए जाने की पुष्टि कर दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट का रिकॉर्ड
इसी साल सुप्रीम कोर्ट की एक जज वाली एक बेंच ने 33 मामलों की सुनवाई की और उनका निपटारा किया। दरअसल, वरिष्ठ जज की गैर-मौजूदगी में जस्टिस दीपक गुप्ता ने अकेले ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू की और कुल 33 मामले निपटाए। तब सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में इतने सारे मामलों का निपटारा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

न्याय व्यवस्था पर एक नजर
सुप्रीम कोर्ट की इंडियन ज्यूडिशियरी एनुएल रिपोर्ट 2015-16 पर एक नजर डालें, तो भारत की अदालतों में 2 करोड़ 81 लाख केस पेंडिंग पड़े हैं। वहीं निचली अदालतों में 5 हजार जजों की कमी भी है।
जनवरी में – 'इंडियन ज्यूडिशियरी एनुअल रिपोर्ट 2015-16' और ‘सबॉर्डिनेट कोर्ट्स ऑफ इंडिया: ए रिपोर्ट ऑन एक्सेस टू जस्टिस 2016' के नाम से जारी इस रिपोर्ट में भारतीय न्यायव्यवस्था की और कई महत्वपूर्ण बातें उजागर होती हैं।
इसके अनुसार – 4 हजार 954 जजों की पोस्ट खाली हैं। जबकि निचली अदालतों में 21 हजार 324 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की पोस्ट सेंक्शन हैं।
– रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जजों की मौजूदा संख्या बड़ी तादाद में केसों का निपटारा करने में नाकाफी है। इसके चलते पेंडिंग मामले बढ़ते जा रहे हैं जो चिंता का विषय है।
– “इसके लिए जरूरी होगा कि जजों के अलावा सपोर्ट स्टाफ बढ़ाया जाए और इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जाए।”
- 13% केसों का हो पाता है ट्रायल
– नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की मानें तो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स एक साल में महज 13 फीसदी मामलों की सुनवाई कर पाते हैं। इस लिहाज से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की स्ट्रेन्थ को 7 गुना तक बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि एक साल में केसों की सुनवाई तो पूरी की जा सके।

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स की हालत ज्यादा खराब
– रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के जिला अलादतों की हालत ज्यादा खराब है।
– गुजरात में 794, बिहार में 792 और उत्तर प्रदेश में 624 जजों की कमी है।
– गुजरात में निचली अदालतों में 1953, बिहार में 1825 और उत्तर प्रदेश में 2394 जजों की पोस्ट्स सेंक्शन हैं। इसके उलट गुजरात के लोअर कोर्ट्स में 1159, बिहार में1033 और यूपी में 1770 जज हैं।
– दिल्ली में भी जजों की 793 पोस्ट्स सेंक्शन हैं जबकि 486 जज काम कर रहे हैं। 307 पोस्ट्स खाली हैं।

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