
पाली शहर में रोड कटिंग के बाद खस्ताहाल सड़कें।
पाली. घर में नल कनेक्शन, सीवरेज कनेक्शन लेना है या किसी निर्माण के दौरान पानी की निकासी आदि करनी है। ऐसे किसी भी कार्य के लिए सड़क तोड़ने की कोई अनुमति नहीं ली जाती है। व्यक्ति या एजेंसी गेंती-फावड़ा लेकर सड़क तोड़ देते हैं। ऐसा करने पर कार्रवाई करना तो दूर कोई टोकता तक नहीं है। कार्य पूरा होने पर गड्ढे में मिट्टी डालकर इतिश्री कर दी जाती है। उस जगह पर डामर या सीमेंट से निर्माण नहीं कराया जाता है। नतीजा वाहन निकलने पर गड्ढा बड़ा होता जाता है। जो अधिक गहरा व चौड़ा होने पर हादसे को न्योता देता है। यह कहानी है पाली शहर के साथ पूरे जिले की। जिसमे सड़कों का निर्माण तो करवाया जाता है, लेकिन चंद दिन बाद ही वहां कोई एजेंसी या व्यक्ति बिना रोक-टोक के गड्ढा कर देते हैं और उसे वैसा ही छोड़ देते है। इससे सड़क धीरे-धीरे बिखरने लगती है और पांच-सात माह में ही राहगीर गड्ढों भरी सड़क का सफर करने को राहगीर मजबूर हो जाते है। उन सड़कों से शहर के प्रशासनिक अधिकारी व निर्माण एजेंसी के अधिकारी भी गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता है।
पाली शहर में लगभग हर गली-मोहल्ले के साथ मुख्य मार्ग को बीच में तोड़ा जा चुका है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने, सूरजपोल-सोमनाथ मार्ग, सूरजपोल, शेखावत नगर, पानी दरवाजा, सिंधी कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड मार्ग, नया गांव मार्ग, बांडी नदी से पणिहारा चौराहा, मस्तान बाबा से शिवाजी सर्कल जैसे मुख्य मार्गों पर ही सड़कों को तोड़ दिया गया है। उनको ठीक नहीं करवाया जा रहा। ऐसे ही हालात शहर की अन्य सड़कों के भी है।
पिछले 2-3 साल से शहर में कई सड़कों का निर्माण कराया गया। जिनमे मुख्य मस्तान बाबा से शिवाजी सर्कल, मिल गेट से घुमटी, बांडी नदी से पणिहारी चौराहा जाने वाले सड़कें मुख्य है। जिन पर रोड कटिंग के बाद हुए गड्ढों के कारण लोग आज निर्माण एजेंसी को कोस रहे है। इन सड़कों पर ज्यादातर पर पानी की पाइप लाइन लीकेज होने, सीवरेज आदि के कारण खुदाई की गई। खोदने की जानकारी तक निर्माण एजेंसी को नहीं दी गई। गलियों में यह कार्य आमजन बिना रोट कट की राशि जमा करवाए कर रहे है।
सड़क को खोदने से पहले निर्माण एजेंसी को प्रार्थना पत्र देना होता है। उसकी अनुमति मिलने पर ही सड़क को खोदा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को अपने निजी कार्य से सड़क खोदनी है तो निर्माण एजेंसी उससे वापस निर्माण की राशि लेकर अनुमति देती है। सरकारी एजेंसी के सड़क पर कार्य करने पर वे स्वयं निर्माण करवाती है। ऐसा नहीं करने पर निर्माण एजेंसी अधिकारियों को लिखकर नोटिस जारी कर सकती है। पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया जा सकता है। दिलीप परिहार, अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पाली
Updated on:
10 Jun 2024, 10:02 PM IST
Published on:
10 Jun 2024, 10:02 PM IST
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