
गजल- आप ही से महफिल है
सतीश सिंह
तुम अनमोल कस्तूरी हो, आईना निहार कर देखो
जिंदगी चंचल नदी है, लहरों संग मचल कर देखो
उम्मीदें संजीवनी हैं, इनके संग चल कर देखो
हौसला भी कश्ती है, सागर में उतर कर देखो
आप से ही है दुनिया, खुद को परख कर देखो
धूप के बाद छांव है, सफर में निकल कर देखो
आंखों में जामे शराब है, जरा झांक कर देखो
मेरी जिंदगी एक खुली किताब है पढ़ कर देखो
आप ही से महफिल है, कभी फूल बन कर देखो
तेरे बिना फिजां खिजां है, खुद को कैद कर देखो
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एक खत मोहब्बत के नाम
सीमा गुप्ता
मत करो मोहब्बत को यूं तुम बदनाम,
मोहब्बत करना नहीं होता इतना आसान,
मैं लिखती हूं आज एक खत मोहब्बत के नाम,
कि थे और है हम अपनी मोहब्बत के इतने कद्रदान,
मेरी प्यारी मोहब्बत..
हुआ जब अपना मिलन,
रूह का रूह से हुआ संगम,
मेरा मन हुआ तेरे संग,
लेने लगा सुंदर स्वप्न की तरंग,
मधु हिलोरें लेने लगी हरदम,
ना दिखे तो मेरा मन चिंता मग्न,
जब दिखे तू मन में खिले प्यार के सुमन,
तुमसंग रहती तो मधुर रस बरसाते गगन,
मोहब्बत की शुरुआत का सुहाना था वो रमण,
जब बंधी मैं प्रणयबधं तेरे संग,
प्यार के सुरीले गीत गाए पवन,
खुशियों की हुई बरसात, हुआ तेरा-मेरा एक साथ,
वो प्यारी मोहब्बत है मेरे प्रिय प्राणनाथ,
फिर मोहब्बत प्रेम में हो गई परिवर्तित,
असीमित, अलौकिक, अपरिभाषित,
सुंदर सब रसों से हुई सुसज्जित।
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कविता-हर पल...प्यार करता हूं मैं
अश्विनी भार्गव
सुमधुर गीतों में...
प्यार भरी कविताओं में ...
तुझे ...
तलाशता हूं मैं!
दिन के उजालों में ...
रात के अंधियारों में ...
तुझे ...
पुकारता हूं मैं!
खूबसूरत वादियों में ...
सागर की लहरों में ...
तुझे ...
निहारता हूं मैं!
उदासी के ख्यालों में ...
तन्हाई के ख्वाबों में ...
तुझे ...
याद करता हूं मैं!
वो ...
तुम हो...
तुम ही हो...
जिसको...
सिर्फ जिसको...
दिल की...
गहराई से...
हर पल...
प्यार करता हूं मैं!!
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