
चुनावी गलियारा : यहां की राजनीति में हमेशा रहा है परिवारों का दबदबा
नामांकन की तारीख नजदीक आने के साथ ही जिले में चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। बारां जिले की दो विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में तीन परिवारों का दबदबा रहा है। बरसों से एक ही परिवार का दबदबा रहा है। छबड़ा में 1967 से अब तक तक दो.तीन चुनाव को छोडकऱ सिंघवी परिवार का वर्चस्व रहा है। पिछले दो दशक का रिकार्ड देखा जाए तो इन परिवारों के लोग की चुनाव लड़ते आ रहे है।
छबड़ा में सिंघवी परिवार को टिकट
छबड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में सिंघवी परिवार का दबदबा रहा है। सबसे पहले 1967 में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में प्रेम सिंह सिंघवी ने चुनाव लड़ा था और विजयी रहे थे।1972 में उन्हें हार का सामना पड़ा था। वापस उन्होंने 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वे विजयी हुए, हालांकि बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के लिए अपने पद इस्तीफा दे दिया था।
पुत्र को लगातार मिल रहा मौका
इस विधानसभा से 1985 में भाजपा ने प्रेम सिंह सिंघवी के बड़े पुत्र प्रताप सिंह सिंघवी को चुनाव मैदान में उतारा था। इस चुनाव में वे विजयी रहे थे। 1990 में बाली के साथ छबड़ा से भी पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत चुनाव जीते थे, लेकिन उन्होंने छबड़ा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के नंदकिशोर विजयी रहे। वर्ष 1993 से लगातार प्रताप सिंह सिंघवी चुनाव लड़ रहे है। पिछले छह चुनावों में से उन्हें पांच में जीत मिली। अब वे इस क्षेत्र से आठवीं बार चुनाव लड़ेंगे।
अब बेटी व पुत्र ने संभाली विरासत
हीरालाल सहरिया के निधन के बाद 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने उनकी पुत्री निर्मला सहरिया को चुनाव मैदान में उतारा। निर्मला ने भाजपा के हेमराज मीणा को परास्त किया था। लेकिन 2013 के चुनाव में भाजपा ने हेमराज मीणा के बजाय उनके पुत्र ललित मीणा को चुनाव लड़वाया। तब ललित ने निर्मला की मां चतरी बाई को हरा दिया। वहीं 2018 में कांग्रेस ने वापस निर्मला सहरिया को टिकट दिया, जबकि भाजपा ने ललित मीणा पर भरोसा जताया। इस चुनाव में निर्मला सहरिया विजयी रही। अभी इस क्षेत्र से दोनों ही दलों ने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।
38 साल से दो परिवार आमने-सामने
जिले में किशनगंज विधानसभा क्षेत्र से शिक्षक का पद छोड़ हीरालाल सहरिया ने 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दर्ज की थी, तब उन्होंने भाजपा के हेमराज मीणा को पराजित किया था। 1990 में इस सीट से भाजपा के हेमराज मीणा विजयी रहे । उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार हीरालाल सहरिया को हराया था। 1993 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर हीरालाल सहरिया ने फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा और भाजपा के हेमराज मीणा को हराया वर्ष 1998 में हीरालाल सहरिया को फिर कांग्रेस ने टिकट दिया था। इस चुनाव में उन्होंने अपने पुराने प्रतिद्वंदी हेमराज मीणा को पराजित किया। वर्ष 2003 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर हेमराज मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार हीरालाल सहरिया को परास्त कर दिया।
Published on:
29 Oct 2023 11:19 am
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