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राजगढ़ में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी, सड़कों पर कचरे के ढेर, निकाली रैली

अलवर के राजगढ़ कस्बे में नगरपालिका के ठेका सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। वाल्मीकि सेना के नेतृत्व में अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े कर्मचारियों ने कस्बे के मुख्य बाजारों से आक्रोश रैली निकाली। हड़ताल की वजह से जगह-जगह गंदगी और कीचड़ का अंबार लग गया है।

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सफाई कर्मचारियों ने निकाली रैली (फोटो - पत्रिका)

अलवर के राजगढ़ कस्बे में अपनी मांगों को लेकर अड़े ठेका सफाई कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को भी नजर आया। वाल्मीकि सेना के बैनर तले जुटे सैकड़ों कर्मचारियों ने काम का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। इसके बाद कस्बे के गोल सर्किल से एक विशाल विरोध रैली शुरू हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां थामे सफाई कर्मी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे।

यह आक्रोश रैली अनाज मंडी, चौपड़ बाजार, कांकवाड़ी बाजार और सराय बाजार जैसे कस्बे के तमाम मुख्य रास्तों से होकर गुजरी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

कर्मचारियों की क्या हैं मुख्य मांगें

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर पालिका प्रशासन को घेरा है। कर्मचारियों की मुख्य शिकायतें और मांगें कुछ इस प्रकार हैं।
सबसे बड़ी मांग यह है कि सफाई व्यवस्था में ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद किया जाए।
कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी (मिनिमम वेज) का भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसे तुरंत लागू किया जाए।
कर्मचारियों को ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) जैसी जरूरी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, उन्हें यह लाभ दिया जाए।
सालों से अपनी सेवाएं दे रहे वाल्मीकि समाज के स्थानीय सफाई कर्मचारियों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए और उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ा जाए।


लोग परेशान

सफाई कर्मचारियों की इस हड़ताल का सीधा असर अब राजगढ़ की आम जनता पर दिखने लगा है। पिछले कुछ दिनों से सफाई न होने के कारण कस्बे के गली-मोहल्लों और मुख्य चौराहों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं। नालियां कीचड़ और गंदगी से पूरी तरह पट चुकी हैं, जिससे उठने वाली बदबू ने स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का जीना मुहाल कर दिया है।

हालांकि, इससे पहले शुक्रवार को उपखंड अधिकारी (SDM) सीमा मीना ने हड़ताली कर्मचारियों से बात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि सफाई कर्मियों को संविदा पर लेने के लिए एक प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। इसके बावजूद ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज कर्मचारी सोमवार को फिर सड़कों पर उतर आए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस कचरा संकट से निपटने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालता है।