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Lockdown : डेनेवर से ये खास रिपोर्ट, लॉकडाउन में क्या कर रहे हैं अमरीकी

-अमरीका में लोकतंत्र है। मानवाधिकार और प्राइवेसी कानून काफी कड़े हैं। इसलिए नागरिकों पर नियम थोंपे नहीं जाते। -कोरोना ने वसंत के खुशनुमा मौसम में घरों में कैद कर दिया

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Lockdown : डेनेवर से खास रिपोर्ट, लॉकडाउन में क्या कर रहे हैं अमरीकी

फूल-पत्तों पर छाई रवानी चारों और खुशबू बिखेर रही है

डेनेवर.

अमरीका में इस वक्त वसंत का मौसम है। फूल-पत्तों पर छाई रवानी चारों और खुशबू बिखेर रही है। यहां पर्यटन के लिए ये श्रेष्ठ समय है, लेकिन कोरोना के खौफ से यहां का जीवन घरों में कैद हैं। यूं तो वायरस की प्रकृति और लॉकडाउन के हालात कमोबेश पूरी दुनिया में एक जैसे हैं, लेकिन इस वक्त वहां लोग इस पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कामकाज पर क्या असर हुआ है? इन सभी मुद्दों पर कोलोराडो प्रांत के डेनेवर में रह रहे अलवर जिले के कोलीला निवासी आइटी इंजीनियर सुरेंद्र सिंह से पत्रिका संवाददाता पुष्पेश शर्मा से विशेष बातचीत।

अभी वहां कैसे हालात हैं?
कोलोराडो में हालात ज्यादा चिंताजनक नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर लॉकडाउन है। लोग परिवार को समय दे पा रहे हैं। घर से काम हो रहा है और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। समय मिलता है तो फिल्में देख लेते हैं और बच्चों के साथ बैठकर गेम्स भी।

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चीन जैसा नियंत्रण क्यों नहीं लाया जा सका
तकनीक में अमरीका, चीन से काफी आगे है। लेकिन चीन ने लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करवाया। वहां पर साम्यवादी सरकार है, इसलिए सख्ती की जा सकती है। अमरीका में लोकतंत्र है। मानवाधिकार और प्राइवेसी कानून काफी कड़े हैं। इसलिए नागरिकों पर नियम थोंपे नहीं जाते। इसी का नतीजा है कि लोग शाम सुबह अब भी पार्क में चले जाते हैं, साइकिल चलाते हैं। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग और सारे नियम फॉलो करते हैं।

क्या राष्ट्रपति चुनाव टलने की भी चर्चाएं हैं?
अभी ऐसा कुछ नहीं लग रहा और चुनाव टलने की कोई चर्चा भी नहीं है। लेकिन वायरस का प्रसार नहीं रुका तो कांग्रेस (संसद) में चर्चा के बाद इसका प्रस्ताव लाया जा सकता है। अभी सभी राजनीतिक दल आपदा से उबरने पर एकमत हैं, कोई विरोधी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। ये बात और है कि आपदा खत्म होने के बाद इससे निपटने की तैयारी, चिकित्सा उपकरणों की कमी पर डेमोके्रट्स टं्रप को घेर सकते हैं।

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वायरस फैलने के और भी कोई कारण?
1. विदेशी यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने से पहले ही काफी संख्या में विदेशी यात्री आ चुके थे और वायरस पैर पसार चुका था। एक तो वायरस का पता देर से चलता है, दूसरा शुरुआत में जांच की रफ्तार धीमी रही, जिससे यह अंदर ही अंदर फैलता गया।

2. यहां की सोशल हैबिट्स भी एक कारण है, जिसमें हाथ मिलाना प्रमुख है। हालांकि मना करने में विनम्रता से मान लेते हैं। जैसे पिछले माह मेरे एक परिचित आए तो मैंने हाथ न मिलाकर भारतीय परंपरा अनुसार हाथ जोडकऱ नमस्ते किया। इस पर उन्होंने बुरा नहीं माना, बल्कि अभिवादन का यह तरीका बताने पर धन्यवाद किया।

3. अंतरराष्ट्रीय टै्रफिक की अधिकता, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वायरस की नेचर भी महामारी को बढ़ाने में जिम्मेदार हैं। वायरस का कई दिन बाद पता चलता है, इसलिए यह पता नहीं चल पाता कि कौन संक्रमण लिए घूम रहा है।