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हम दूसरों के जीवन में आग लगाने की बजाय बाग लगाएं : संत ललितप्रभ

टाउन हॉल प्रांगण में चल रहा चातुर्मासिक प्रवचन का दौर

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हम दूसरों के जीवन में आग लगाने की बजाय बाग लगाएं : संत ललितप्रभ

हम दूसरों के जीवन में आग लगाने की बजाय बाग लगाएं : संत ललितप्रभ

उदयपुर. महावीर की अहिंसा और प्रेम को पूरे विश्व में फैलाया जाना चाहिए। अहिंसा से विश्व में शांति आएगी और प्रेम से धरती समृद्ध होगी। विध्वंस करने वाला शैतान होता है और सृजन करने वाला भगवान। धरती पर मारकाट करने वाले कभी याद नहीं किए जाते। अगर ओसामा बिन लादेन जैसे लोग अपनी शक्ति विश्व का निर्माण करने में लगाते तो आज भगवान की तरह पूजे जाते।
यह बात राष्ट्र-संत ललितप्रभ ने बुधवार को टाउन हॉल प्रांगण में धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अहिंसा हमसे चाहती है कि हम दूसरों के जीवन में आग लगाने की बजाय बाग लगाएं। अगर हमारे पास तीली है तो हम उसका उपयोग घरों को जलाने की बजाय घरों के अंधकार को दूर करने में करें। हमारे पास लाख रुपए हो तो उससे मंदिर बनाने के साथ गरीबों को ऊपर उठाने में उपयोग करेंगे तो इससे प्रभु ज्यादा खुश होंगे।

उन्होंने कहा कि अगर हम औरों से लाड चाहते हैं तो भूलकर भी किसी से लड़ाई न करें। प्रभु की सच्ची पूजा तभी होगी जब हम अहिंसा के स्तंभ बनाने की बजाय जीवन को अहिंसामय बनाएंगे।
समारोह का शुभारम्भ प्रवीण चौधरी, भीलवाड़ा और नीलेश बाफना इंदौर ने दीपप्रज्वलन के साथ किया। समिति के सह संयोजक दलपतसिंह दोशी ने बताया कि गुरुवार को सुबह 8.45 बजे संत चन्द्रप्रभ 6 कर्तव्यों का पालन देगा हमें दिव्य जीवन विषय पर विशेष प्रवचन देंगे।


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