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इंडोनेशिया का ‘गुनुंग पडांग’ दुनिया का सबसे पुराना पिरामिड

गुनुंग पडांग की भूमिगत परतें 9,500 से 28,000 साल पहले की हैं। इससे यह ऐतिहासिक स्थल न केवल पहला पिरामिड बल्कि दुनिया की सबसे पुरानी अखंड संरचना भी बन जाएगा।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Nov 05, 2023

इंडोनेशिया का 'गुनुंग पडांग' दुनिया का सबसे पुराना पिरामिड

इंडोनेशिया का 'गुनुंग पडांग' दुनिया का सबसे पुराना पिरामिड

जकार्ता। इंडोनेशिया में एक लावा की पहाड़ी के भीतर बनी 98 फीट गहरी संरचना दुनिया का सबसे पुराना पिरामिड हो सकती है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह न केवल मिस्र के गीजा के सभी स्मारकों और पिरामिडों से बल्कि प्रसिद्ध स्टोनहेंज से भी पुराना है। नवीनतम रेडियोकार्बन डेटिंग के मुताबिक यह अपने आकार का सबसे पुराना ज्ञात इंसानी निर्माण भी हो सकता है। इंडोनेशिया में इस महापाषाण स्थल को 'गुनुंग पडांग' कहा जाता है।

विलुप्त ज्वालामुखी पर बनाई गई संरचना:

इंडोनेशिया की पहाड़ी जो प्राचीन पत्थर की संरचनाओं से भरी हुई है और पश्चिम जावा द्वीप पर स्थित है, स्थानीय लोगों द्वारा पवित्र मानी जाती है। यहां लोग इसे 'पुंडेन बेरुंडक' कहते हैं, जिसका अर्थ है छतों के लिए एक सीढ़ीदार पिरामिड जो धीरे-धीरे अपने शिखर की ओर बढ़ता है। यह संरचना सभ्यताओं के अस्तित्व में आने और मनुष्यों के कृषि की शुुरुआत करने से पहले एक विलुप्त ज्वालामुखी के ऊपर बनाई गई थी।

इसकी भूमिगत परतें हजारों साल पुरानी:

पुरातत्वविदों का कहना है कि इसके कक्षों में अज्ञात प्राचीन खजाने भी छिपे हो सकते हैं। यह विशाल स्थल जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। इंडोनेशिया की नेशनल रिसर्च एंड इनोवेशन एजेंसी के पुरातत्वविदों और भूवैज्ञानिकों की टीम ने धीरे-धीरे संरचना की कई परतों को उजागर किया जो 15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई हैं। गुनुंग पडांग की भूमिगत परतें 9,500 से 28,000 साल पहले की हैं। इससे यह ऐतिहासिक स्थल न केवल पहला पिरामिड बल्कि दुनिया की सबसे पुरानी अखंड संरचना भी बन जाएगा।

अलग-अलग चार चरणों में हुआ निर्माण:

इस हालिया अध्ययन के नतीजे कई वर्षों तक साइट पर शोध करने के बाद आए हैं। पहले इस स्थान को प्राकृतिक पहाड़ी समझ लिया गया था, फिर व्यापक शोध से पता चला कि पूरी संरचना हजारों वर्षों में इंसानों ने बनाई। विद्युत प्रतिरोधकता टोमोग्राफी, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार और भूकंपीय टोमोग्राफी सहित विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके शोधकर्ता पहाड़ी की आंतरिक विशेषताओं के साथ-साथ इसके निर्माण के कालक्रम की तस्वीर बनाने में सक्षम हुए। सात विभिन्न बिंदुओं पर कोर ड्रिलिंग से पता चला कि पिरामिड चार अलग-अलग चरणों में बना।

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