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हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद है गालियां देना, जानें क्या है इस सनसनीखेज़ खुलासे का सच

वैज्ञानिक मानते हैं कि गाली देने की गंदी आदत आपके लिए काफी फायदेमंद होती है।

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Sunil Chaurasia

Mar 02, 2018

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नई दिल्ली। हमारे देश में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी गालियों को काफी बुरा और अशिक्षित भाषा माना जाता है। लेकिन अब हम आपसे ये कहें कि गालियां देना बहुत ही लाभकारी होता है। हो गया न दिमाग खराब, आगे कुछ कहने से पहले ये बता दें कि ऐसा कहना हमारा नहीं बल्कि एक स्टडी का है। लेकिन सबसे खास बात ये है कि जब आप भी इस पूरी स्टोरी को पढ़ेंगे तो आपको गालियों की असली शक्ति के बारे में सब-कुछ मालूम पड़ जाएगा।

वैसे भी आप देखते होंगे कि आज-कल की पीढ़ी हर बात पर गालियां देती हैं, चाहे वो कोई खुशी की बात हो या फिर दुख की। इतना ही नहीं गालियों का स्तर शहरों के साथ-साथ गांवों में भी काफी ऊपर पहुंचा हुआ है। चलिए अब सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं। दरअसल वैज्ञानिक मानते हैं कि गाली देने की गंदी आदत आपके लिए काफी फायदेमंद होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गालियां देने से आपके दिल और दिमाग को काफी सुकून मिलता है।

इतना ही नहीं निरंतर गालियां देने वाले लोग ज़िंदगी में आने वाली कई तरह की मुसीबतों का सामना भी बड़ी ही आसानी से कर लेते हैं। साल 2009 में इंग्लैंड के कीले यूनीवर्सिटी में गालियों पर एक स्टडी की गई थी। स्टडी में कई लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें कुछ लोग गाली देने के आदी थे तो कई लोग कभी अपने मुंह से गंदे शब्दों को नहीं निकालते थे। वैज्ञानिकों ने कई दिनों तक दोनों किस्म के लोगों को ऑब्ज़र्ब किया और चौंकाने वाले परिणामों से रूबरू हुए।

स्टडी में वैज्ञानिकों ने देखा कि गाली न देने वालों के मुकाबले गाली देने वाले लोग ज़्यादा खुश रहते हैं। इसके अलावा दोनों ग्रुप के लोगों पर एक खास प्रयोग भी किया गया। लोगों को एक बर्तन में रखे बर्फीले पानी में हाथ रखने को कहा गया। इस टास्क में गाली देने वाले लोगों ने तो गालियां देकर बर्फीले पानी की ठंडक को सहन कर लिया। लेकिन गाली ने देने वाले लोगों ने बहुत ही जल्दी ठंडे पानी से अपना हाथ बाहर निकाल लिया।

स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारे शरीर में मौजूद एड्रिनलीन नामक हार्मोन गालियां देने की वजह से ही काफी तेज़ी से रिलीज होता है। एड्रिनलीन नाम का यह हार्मोन इंसान को दर्द सहने की शक्ति देता है। लेकिन इस पूरी स्टडी में सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि ये पूरा सिस्टम पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ज़्यादा कारगार है।