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बांध के बंधन ढीले, पेटे में मिट्टी-रॉक… भुना रहे हिस्ट्री, करा रहे वाटर वॉक

रामगढ़ बांध का गला घोंटकर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं ने इसे सिर्फ 'हिस्ट्री' बनाकर छोड़ दिया है।

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जयपुर . रामगढ़ बांध का गला घोंटकर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं ने इसे सिर्फ 'हिस्ट्री' बनाकर छोड़ दिया है। देश-दुनिया से गुलाबी नगर आने वाले पर्यटक इसे देखने की चाह रख रहे हैं, लेकिन गाइड पर्यटकों को रामगढ़ बांध में पानी नहीं होने के कारण उन्हें 'वाटर-वॉक' करवाकर सिर्फ हिस्ट्री बता रहे हैं। इसमें पर्यटकों को बांध दिखाने के साथ पानी आवक के रास्ते और उसका इतिहास बताया जा रहा है। आसपास की हरियाली दिखाई जा रही है। जमवाय माता का मंदिर और आंधी रोड पर स्थित अन्य छोटे बांध दिखाए जा रहे हैं।

एशियाड की नौकायन प्रतियोगिता ने बांध की देश-विदेश में पहचान बनाई है। बाहर से आने वाले पर्यटक इस बांध को देखना चाहते हैं। यही वजह है कि कुछ गाइड पर्यटकों को बांध की सैर कराने ले जा रहे हैं। इसे 'रामगढ़ बांध की वाटर-वॉक' नाम भी दे रखा है। इसमें पर्यटकों को मौके पर लेजाकर बांध दिखाया जाता है। बांध का पूरा इतिहास बताया जाता है। बांध में पानी आवक के रास्ते बताए जा रहे हैं। इस समय यहां आसपास की हरियाली भी दिखाई जा रही है। इसके साथ ही आंधी रोड पर स्थित एक छोटा बांध और जमवाय माता मंदिर की भी सैर करा रहे हैं।

सूखा बांध देख, ठगा सा करते महसूस
रामगढ़ बांध को देखने पहुंच रहे कुछ पर्यटक उसमें पानी नहीं मिलने से अपने को ठगा सा भी महसूस कर रहे हैं। पर्यटक बांध के सूखने का कारण भी पूछते हैं।

जल संरक्षण के लिए रखता पहचान
जयपुर जल संरक्षण के लिए देश-दुनिया में अलग ही पहचान रखता है। यहां पर्यटकों के लिए वाटर—वॉक जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं। जल संरक्षण व पर्यावरण के साथ रामगढ़ बांध के एतिहासिक महत्व को पयर्टकों तक पहुंचाया जाता है। पर्यटक रामगढ़ बांध देखना चाहते हैं।
- संजय कौशिक, पर्यटन विशेषज्ञ

पर्यटक करते वाटर-वॉक करना पसंद
पर्यटक वाटर-वॉक करना पसंद करते हैं। जयपुर में रामगढ़ बांध पर पर्यटकों को ले जाकर वहां का इतिहास बताते हैं। पानी के चैनल बताए जाते हैं। आसपास की हरियाली दिखाई जाती है, जो पर्यटकों को पसंद आती है।
- नीरज दोसी, वाटर-वॉक विशेषज्ञ

बांध का इतिहास बताया जाता
जयपुर आने वाला टूरिस्ट आज भी बांध को देखना चाहता है। खासकर विदेशों से आने वाले पर्यटक वहां जाना चाहते हैं। बांध में पानी नहीं होने की जानकारी देने के बाद भी कुछ पर्यटक जाते हैं, उन्हें बांध का इतिहास बताया जाता है। रामगढ़ बांध फिर से जिंदा जो जाए तो पर्यटन को पंख लग जाए।
-राजेश खंडेलवाल, महामंत्री, अंबर फोर्ट शिलादेवी गाइड यूनियन, मावठा आमेर