
जयपुर। लगभग 14 करोड़ से 10 करोड़ साल पहले, जो ज़मीन आज ऑस्ट्रेलिया है, वह पृथ्वी के काफी दक्षिणी हिस्से में थी। उस समय विक्टोरिया (Victoria) नाम का क्षेत्र ध्रुवीय क्षेत्र (Polar Circle) के अंदर था — भूमध्य रेखा से लगभग 80 डिग्री दक्षिण में — और वहां कई महीनों तक अंधेरा छाया रहता था।
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, डायनासोर वहां अच्छी तरह से जीवित रहे और उन्होंने कई जीवाश्म स्थलों (fossil sites) पर अपने अस्तित्व के प्रमाण छोड़े।
दशकों से वैज्ञानिक इन स्थलों पर आकर डायनासोर की हड्डियों से भरी चट्टानों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि वे इन प्राचीन जीवों को बेहतर समझ सकें।
एक नई रिसर्च, जो पौधों की सूक्ष्म जीवाश्मों (fossil spores and pollen) पर आधारित है और 'Alcheringa' पत्रिका में प्रकाशित हुई है, इन डायनासोरों के निवास वाले वनों के विकास की कहानी बताती है और पहली बार उन वनों का विस्तृत चित्रण भी करती है।
यह घटना 'अर्ली क्रेटेशियस काल' (Early Cretaceous epoch) में हुई थी, जो लगभग 14 करोड़ से 10 करोड़ साल पहले का समय था। उस समय पृथ्वी का तापमान बहुत अधिक था, जिसका मुख्य कारण ज्वालामुखी गतिविधियों से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा में वृद्धि थी।
इस गर्म जलवायु के कारण धरती पर ध्रुवीय बर्फ नहीं थी, समुद्र का जलस्तर ऊँचा था, और कई महाद्वीप डूबे हुए थे।
उस समय, धरती के दक्षिणी महाद्वीप 'गोंडवाना' (Gondwana) एक साथ जुड़े हुए थे और वे अब बंटने लगे थे। दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया ध्रुवीय क्षेत्र में था और वहां 'ध्रुवीय डायनासोर' रहते थे।
इनमें छोटे 'ऑर्निथोपोड्स' (वनस्पति खाने वाले डायनासोर) और शिकारी 'थेरोपोड्स' शामिल थे।
डायनासोरों की उम्र तय करने के लिए वैज्ञानिकों ने 'पैलिनोलॉजिस्ट्स' (Palynologists – सूक्ष्म पौधों के जीवाश्मों के विशेषज्ञों) की मदद ली।
उन्होंने चट्टानों से स्पोर और परागकणों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि ये हड्डियाँ 13 करोड़ से 10 करोड़ साल पुरानी हैं।
इसके साथ ही उन्होंने पौधों के जीवाश्मों की सहायता से यह समझने की कोशिश की कि उस काल के जंगल कैसे थे और समय के साथ वे कैसे बदले।
करीब 13.2 करोड़ साल पहले धरती पर फूलों वाले पौधे (flowering plants) पहली बार दिखाई दिए। इसके बाद उन्होंने बहुत तेज़ी से पूरी दुनिया में फैलाव किया।
हमारी रिसर्च से पता चला कि गर्म मौसम ने इन पौधों को विकसित होने और तेजी से नए क्षेत्रों में फैलने में मदद की। बाढ़ जैसी घटनाओं के बाद ये पौधे निचले जंगलों में अन्य पुराने पौधों (जैसे कि लाइकोफाइट्स) की जगह लेने लगे।
इस बदलाव के कारण कई पुराने पौधे जैसे कि फर्न (ferns) विलुप्त हो गए।
तब विक्टोरिया के जंगलों में मुख्य रूप से शंकुधारी पेड़ों का छत्र था। उसके नीचे फर्न और बीज वाले फर्न थे। और सबसे नीचे, ज़मीन के पास, फूलों वाले पौधे, फर्न, लीवरवॉर्ट्स, हॉर्नवॉर्ट्स और मॉस पाए जाते थे।
उस समय वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक थी, जिससे धरती गर्म थी। यह स्थिति आज की जलवायु परिवर्तन की परिस्थिति से मिलती-जुलती है।
उस प्राचीन समय के जीवन की कहानी आज के वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकती है कि वर्तमान और भविष्य में जलवायु परिवर्तन का जीवन पर क्या असर पड़ेगा।
Published on:
03 Jun 2025 05:54 pm
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