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पांच साल से चिकित्सक नहीं, पशुपालक परेशान

एक ओर राज्य सरकार पशुधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हिण्डोली उपखंड क्षेत्र के कई पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सक नहीं होने के चलते पशुधन सहायकों के भरोसे पशु चिकित्सालयों की सेवाएं चल रही है, जिसके कारण पशुपालकों को आए दिन परेशान होना पड़ता है।

बूंदीJun 15, 2024 / 07:32 pm

पंकज जोशी

पांच साल से चिकित्सक नहीं, पशुपालक परेशान

गोठड़ा. कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय।

गोठड़ा. एक ओर राज्य सरकार पशुधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हिण्डोली उपखंड क्षेत्र के कई पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सक नहीं होने के चलते पशुधन सहायकों के भरोसे पशु चिकित्सालयों की सेवाएं चल रही है, जिसके कारण पशुपालकों को आए दिन परेशान होना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर पशु चिकित्सक नहीं होने के चलते कई उप केंद्रों की व्यवस्थाएं बिगड़ी हुई है।
जानकारी अनुसार हिण्डोली उपखंड का सबसे बड़ा कस्बा गोठड़ा में पिछले 5 साल से पशु चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है, जिसके कारण दो दर्जन से अधिक गांवों के पशु पालकों को परेशान होना पड़ रहा है। कस्बें के पशु चिकित्सालय में एक पशुधन सहायक ही लंबे समय से पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। यहां पर पशु चिकित्सक सहित पशुधन परिचर आदि का पद रिक्त होने से व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं।
उप केंद्रों के हाल बेहाल
गोठड़ा पशु चिकित्सालय के अधीन कई गांवों के पशुधन केंद्र आते है। जहां पर पशुधन सहायकों के समय पर नहीं मिलने से पशु पालकों को परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीण मोहन लाल राठौर ने बताया कि पशु चिकित्सक का पद रिक्त होने से कई पशु पालक चिकित्सालय में पशुओं का उपचार करवाने के लिए लाते हैं, लेकिन यहां पर पशु चिकित्सक नहीं होने के चलते उन्हें निराश लौटना पड़ता है।
कई बार जिला प्रशासन एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर पशु चिकित्सक लगाने की मांग की गई, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। चिकित्सालय में मिलने वाली निशुल्क दवा योजना का भी पशुपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में चिकित्सालय में पशु चिकित्सा होना जरूरी है।

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