मां, जिसके बिना हर कोई अधूरा है, बच्चा जब पैदा होता है, आखें भी नहीं खोलता है, तब से लेकर जिंदगी की अंतिम सांस तक केवल मां ही होती है जो बच्चे को पूरी तरह समझ सकती है। माँ का पेट तब ही भरता है जब उसके बच्चे खाना खा चुके होते हैं, माँ की ममता में वो मिठास होती है कि उसकी ममता के छाव में रहने को तो ईश्वर भी लालायित हो जाते है। बेशक समय कितना ही बदल जाए पर हमारे देश के संस्कार ही ऐसे है कि माँ का प्यार ना कभी बदला है ना कभी बदलेगा। इस बात को आज के मासूम बच्चे भी समझते हैं। आप जरा सोच कर देखिये कि जिन बच्चों के मां-बाप नहीं होते, उन बच्चों का जीवन कैसा होता होगा? क्या उन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब होती होगी?