
Saiyid Nurul Hasan
नई दिल्ली। जाने-माने इतिहासकार सय्यद नुरूल हसन का जन्म 26 दिसंबर 1921 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा क सदस्य रहे हसन 1971 से लेकर 1977 तक केंद्रीय शिक्षा, सामाजिक विकास और संस्कृति मंत्री रहे। वह 1986 से 1993 तक पश्चिम बंगाल और ओडि़शा के राज्यपाल भी रहे।
उनका जन्म सय्यद अब्दुल हसन और नूर फातिमा के घर हुआ था। उनके पिता जिला अवस्थापन अधिकारी थे, जो बाद में कोर्ट ऑफ वार्डस के अध्यक्ष बने। उनके दादा सर सय्यद वजीर हसन कोर्ट ऑफ औध के मुख्य न्यायाधीश थे। वह मुस्लिम ली के अध्यक्ष रहे और हिंदू-मुस्लिम एकता की हमेशा वकालत करते थे।
नुरूल के एक बेटा और एक बेटी है। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई लखनऊ के सुल्तान उल मदरिस और कोलकाता के ला मार्टिनेनीयिरी बॉयस कॉलेज से की। उन्होंने स्नातक की डिग्री इलाहाबाद के मुइर सेंट्रल कॉलेज से की। उन्होंने ऑक्सफोर्ड के न्यू कॉलेज से एमए और डी.फिल की डिग्रियां हासिल की।
हसन 1969 से लेकर 1978 तक राज्यसभा सांसद रहे। 1971 से लेकर 1977 तक वह देश के शिक्षा मंत्री रहे। इसके बाद 1977 से लेकर 1980 तक नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च (सीएसआईआर) के उपाध्यक्ष रहे। 1983 से 1986 तक वह सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे। इसके बाद 1986 से 1989 और 1989 से 1993 तक वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। 1989 में वह ओडि़शा के भी राज्यपाल रहे। गुर्दे की बीमारी के चलते 1993 में उनका कलकत्ता (अब कोलकाता) में निधन हो गया।
Published on:
26 Dec 2015 12:19 am
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