27 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जलाशयों में जलकुंभी, मल्याडी पक्षीधाम संकट में

कभी पक्षीप्रेमियों का स्वर्ग रहा क्षेत्र अब खो रहा आकर्षण उडुपी. कुंदापुर तालुक के तेक्कट्टे राष्ट्रीय राजमार्ग से कुछ किलोमीटर दूर स्थित मल्याडी पक्षीधाम कभी पक्षीप्रेमियों का प्रिय स्थल था। यहां सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी आश्रय पाते थे। कैमरा और दूरबीन लेकर पक्षीप्रेमी समूहों में आते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। यहां […]

less than 1 minute read
Google source verification
Malyadi Bird Sanctuary is in danger

ब्लैक हेडेड आइबिस।

कभी पक्षीप्रेमियों का स्वर्ग रहा क्षेत्र अब खो रहा आकर्षण

उडुपी. कुंदापुर तालुक के तेक्कट्टे राष्ट्रीय राजमार्ग से कुछ किलोमीटर दूर स्थित मल्याडी पक्षीधाम कभी पक्षीप्रेमियों का प्रिय स्थल था। यहां सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी आश्रय पाते थे। कैमरा और दूरबीन लेकर पक्षीप्रेमी समूहों में आते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।

यहां के जलाशयों में पहले बत्तखों की चहचहाहट गूंजती थी, अब पक्षियों की संख्या बेहद कम हो गई है। जलाशयों में जलकुंभी और साल्वेनिया जैसी वनस्पतियों ने पानी को घास के मैदान में बदल दिया है। वाराही नदी से लगातार पानी आने के कारण जलस्तर हमेशा समान रहता है, जिससे पक्षियों को भोजन नहीं मिल पाता।

पक्षी विशेषज्ञ वी. लक्ष्मीनारायण उपाध्याय ने कहा कि अत्यधिक जलसंचय ने इस पक्षीधाम को नुकसान पहुंचाया है। पहले जलस्तर घटने पर पक्षियों को भोजन मिलता था, अब वे दूर चले गए हैं। साथ ही मानव गतिविधियां और वाहनों का शोर भी पक्षियों को भयभीत करता है।

कभी यहां प्रवासी पक्षी जैसे गोल्डन प्लावर, सैंड प्लावर, व्हाइट नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट आते थे। अब ये नाम केवल पर्यटन विभाग के बोर्ड पर ही दिखाई देते हैं। वर्तमान में यहां केवल जकाना, स्वांप हेन, ब्लैक हेडेड आइबिस और बगुले ही दिखते हैं।

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यह क्षेत्र धान के खेत था। ईंट कारखानों के लिए मिट्टी निकालने से बने गड्ढों में वर्षा जल भर गया और यह प्राकृतिक पक्षीधाम बन गया। लेकिन अब यह आकर्षण खो रहा है।

बड़ी खबरें

View All

खास खबर

ट्रेंडिंग