
अमरीकी रैपर निप्सी हसल
जयपुर.
रैपर (रैप सिंगर्स) की दुनिया खूब चकाचौंध भरी है। लेकिन इसके पीछे का स्याह पहलू शायद ही किसी ने गौर किया हो। अमरीका में पिछले तीन वर्ष में कई युवा रैपर्स की मौत कई सवाल छोड़ती है। पिछले वर्ष दिसंबर में अमरीकन रैपर ज्यूस वल्र्ड की 21 वर्ष की अल्पायु में मौत हो गई। मार्च में 33 वर्षीय अमरीकी रैपर निप्सी हसल की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। सितंबर 2018 में ड्रग्स की ओवरडोज लेने के बाद रैपर मैक मिलर (26) की स्टूडियो में ही मौत हो गई। जून 2018 में 20 वर्षीय एक्सटेंटेशन की मियामी में कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी दिन पिट्सबर्ग में 21 वर्षीय रैपर जिमी वूपो की भी फायरिंग कर हत्या कर दी गई। जबकि नवंबर 2017 में 21 वर्षीय लिल पीप की नशे की गोली अधिक लेने से मौत हो गई। इन सभी कलाकारों की अलग-अलग परिस्थितियों में मौत हुई। कुछ नशे की गिरफ्त में आ गए तो कुछ को निशाना बनाया गया। इन मौतों से संगीत जगत में चिंता नजर आ रही है। क्या रैपर इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं? माना जा रहा है कि इन मौतों में छुपा नस्लीय भेदभाव और भीड़भरी घुटन से राहत के लिए मादक पदार्थों की लत लग जाती है।
इधर संगीत, उधर नस्लीय सोच उभर रही थी
एक रैप स्टार की मौत बताती है कि समाज कितना असहाय और भावना शून्य हो रहा है। संगीत की धमक में लोग जीवन की सच्चाई भूल जाते हैं। जिस समाज को संगीत से सिखा सकते थे, उन्होंने मौत से सिखाया। वे अपने संगीत को आकार दे रहे थे, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नस्लीय सोच जन्म ले रही थी। अमरीका में ज्यादातर रैपर अफ्रीकी मूल के या अश्वेत हैं, लिहाजा उन्हें नस्लीय घृणा और हमलों का शिकार होना पड़ा।
Published on:
01 Mar 2020 08:28 pm
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