
घर को दे रहीं प्राथमिकता, देश में घट रही कामकाजी महिलाओं की तादाद
भारत कई क्षेत्रों में काफी हद तक विकसित हो चुका है लेकिन लैंगिक समानता के मामले में यह अभी पिछड़ा हुआ है। देश के श्रमबल में महिला श्रमिकों की भागीदारी बेहद कम है। वेतन और काम के अवसरों में लैंगिक भेदभाव इसके प्रमुख कारण हैं । वर्ल्ड बैंक के अनुसार देश में पुरुष और महिला श्रमबल भागीदारी के बीच का अंतर 57 प्रतिशत है। बीते दशकों में समग्र रूप से महिला श्रमिकों के प्रतिशत में तेजी से गिरावट हुई है। वर्ष 1990 में देश में श्रमबल में महिलाओं का योगदान 30.४ प्रतिशत था, जो वर्ष 2021 तक घटते-घटते महज 19.2 फीसद ही रह गया।
पड़ोसी देशों से भी पिछड़ रहा भारत:
ग्लोबल जेंडर गैप की उपश्रेणी 'आर्थिक भागीदारी और अवसर' में 146 देशों में भी भारत का स्थान 143वां था। जबकि पड़ोसी देशों चीन (37वां स्थान), श्रीलंका(122वां स्थान) और बांगलादेश (141वां स्थान) की स्थिति भारत से काफी बेहतर रही। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने उच्च पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी में लैंगिक अंतर को कम करने की दिशा में प्रगति की है। वर्ष 2022 में महिला विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों की हिस्सेदारी 14.6 फीसदी से 17.6 प्रतिशत हो गई।
Published on:
07 Jan 2023 11:18 am
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