
pollution
आमतौर पर सर्दी के दिनों में बिगड़ने वाली शहर की आबोहवा गर्मी के सीजन की शुरूआत के साथ ही बिगड़ गई है। मार्च माह में सीकर शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक एक्यूआई ग्रीन केटेगिरी से निकलकर यलो केटेगरी में शामिल हो गया है। चिंताजनक बात है कि आगामी दिनों में फसलों की कटाई और तेज गर्मी के कारण प्रदूषण का स्तर ओरेंज जोन में भी पहुंच सकता है। इससे रक्त संचार संबंधी समस्याएं, मतली, एकाग्रता की कमी जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। चिकित्सकों के अनुसार लगातार अधिक प्रदूषण में रहने पर दिल के दौरे और ब्रेन स्ट्रोक जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। जिला मुख्यालय पर कल्याण अस्पताल में पिछले 15 दिन में शहर में हवा की गुणवत्ता खराब होने से सांस और एलर्जी के मरीज बढ़े हैं।
यह है कारण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार हवा का तापमान हवा की गति पर निर्भर करता है। तापमान ज्यादा होने पर वातावरण में मौजूद धूल कण तेजी से ऊंचाई तक फैल जाते हैं। यही कारण है कि ज्यादा तापमान का सीधा असर पीएम 2.5 पर पड़ता है। तेज धूप के दौरान पीएम 2.5 का घनत्व बढ़ जाता है। ज्यादा तापमान औऱ पीएम 2.5 के कारण श्वास संबंधी गंभीर समस्या पैदा होती है और फेफड़ों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसके अलावा गर्मी के दिनों में उत्तरी हवाओं की बजाए उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी हवाएं चलने लगती है। इससे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों से आने वाली धूल भरी हवाओं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
तारीख- एक्यूआई
16 मार्च- 64
17 मार्च-89
18 मार्च-79
19 मार्च-91
20 मार्च-74
21 मार्च-84
24 मार्च- 113
25 मार्च-125
26 मार्च-139
27 मार्च-128
28 मार्च-162
29 मार्च-167
30 मार्च-156
31 मार्च-163
1 अप्रेल- 136
कई कारण जिम्मेदार
गर्मी के सीजन में फसलों की कटाई के दौरान उड़ने वाली धूल के कण वातावरण में ज्यादा दूरी तक तैरते रहते हैं। वाहन और औद्योगिक इकाइयों सहित प्रदूषण बढ़ाने के कारणों और नियंत्रण के लिए नियमित मॉनिटरिंग होती है।
सविता चौधरी, आरओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
Published on:
05 Apr 2025 11:13 am
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