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महिला अस्पताल: 1 बेड पर दो प्रसूताएं भर्ती, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव

राजकीय महिला चिकित्सालय में सुविधाओं का टोटा है। यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि एक बेड़ पर दो गर्भवती महिलाओं को लेटना पड़ रहा है और कई बार तो महिलाओं को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है। उनकी प्रसव पीड़ा इससे और बढ़ रही है। वहीं चिकित्सालय में प्रतिदिन 300 से 400 महिलाओं की ओपीडी रहती है। एक माह में 8 से 10 हजार मरीजों की संख्या रहती है।

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अलवर

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jitendra kumar

Nov 20, 2023

महिला अस्पताल: 1 बेड पर दो प्रसूताएं भर्ती, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव

महिला अस्पताल: 1 बेड पर दो प्रसूताएं भर्ती, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव

राजकीय महिला चिकित्सालय में सुविधाओं का टोटा है। यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि एक बेड़ पर दो गर्भवती महिलाओं को लेटना पड़ रहा है और कई बार तो महिलाओं को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है। उनकी प्रसव पीड़ा इससे और बढ़ रही है। वहीं चिकित्सालय में प्रतिदिन 300 से 400 महिलाओं की ओपीडी रहती है। एक माह में 8 से 10 हजार मरीजों की संख्या रहती है। इसमें से 30 से 40 महिलाओं की प्रतिदिन डिलीवरी हो रही है और आठ से दस महिलाओं का ऑपरेशन होता है। गभर्वती महिलाओं को जगह के अभाव होने के कारण कई महिलाओं को यहां से निराश होकर दूसरे अस्पतालों में भर्ती होना पड़ता है। महिला चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई बार लिखित में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) को सूचना दी गई है, लेकिन उनकी ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

ये है बेड़ों की स्थिति

राजकीय महिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों की तुलना में बेड़ों की संख्या आधी है। जब किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी होती है तो एक से दो दिन तक चिकित्सालय में रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में इनकी संख्या बढ़ जाती है और बेडो का टोटा हो जाता है। महिला और शिशु चिकित्सालय के अलावा अतिरिक्त बेड मिलाकर संख्या 586 बताई जा रही है। इसमें महिला चिकित्सालय में 155 बेड, शिशु अस्पताल 100 बेड हैं। बाकी 331 बेडों की व्यवस्था किए जाने का दावा किया जा रहा है। चिकित्सालय में 100 से 125 गर्भवती महिलाएं प्रतिदिन भर्ती हो रही हैं तथा 40 से 50 महिलाएं डाक्टर को दिखाने के बाद वापस लौट रही हैं। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के बाद तीन से चार दिन रखा भी जाता है। कुछ गंभीर केस में महिलाओं को एक सप्ताह से 10 दिन तक रोका जाता है। ऐसे में लगातार गर्भवती महिलाओं की भीड़ यहां बढ़ती रहती है। ऐसे में बेडों की संख्या कम पड़ जाती है और आखिर में एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को सुविधा मुहैया करवाने के लिए दो नए वार्ड चिकित्सालय में खोले गए हैं। इसमें गाइनिक वार्ड और बच्चों का पीआईसीयू वार्ड है। यह दोनों वार्ड संसाधनों के लिए तरस रहे हैं। इनमें अब तक न तो स्टॉफ की पूर्ति हुई और न ही वार्ड ब्वाय की। साथ ही मूलभूत आवश्यकता के संसाधन कम हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन द्वितीय तल पर होता है। मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट को खराब हुए कई माह बीत चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई सुध नहीं ली है। मरीजों को द्वितीय तल पर आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

महिला चिकित्सालय में बेडों की संख्या काफी बढ़ाई गई है। आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार ही सुविधा दी गई हैं और सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।

डॉ सुनील चौहान, पीएमओ, अलवर