script दुनिया में सफेद गैंडे की पहली आइवीएफ प्रेग्नेंसी ने प्रजाति के लिए जगाई उम्मीद | World's first IVF rhino pregnancy 'could save species' | Patrika News

दुनिया में सफेद गैंडे की पहली आइवीएफ प्रेग्नेंसी ने प्रजाति के लिए जगाई उम्मीद

locationजयपुरPublished: Jan 27, 2024 11:02:03 am

Submitted by:

Kiran Kaur

वर्तमान में पूरी दुनिया में महज दो ही उत्तरी सफेद गैंडे बचे हैं। सफेद गैंडे की दो अलग-अलग उप-प्रजातियां होती हैं, उत्तरी और दक्षिणी।

दुनिया में सफेद गैंडे की पहली आइवीएफ प्रेग्नेंसी ने प्रजाति के लिए जगाई उम्मीद
दुनिया में सफेद गैंडे की पहली आइवीएफ प्रेग्नेंसी ने प्रजाति के लिए जगाई उम्मीद
नैरोबी। उत्तरी सफेद गैंडों को बचाने की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। वैज्ञानिकों ने इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आवीएफ प्रेग्नेंसी का सहारा लिया है। इसके लिए उन्होंने प्रयोगशाला में निर्मित गैंडे के भ्रूण को सरोगेट मां में सफलतापूर्वक स्थानांतरित करके दुनिया की पहली आइवीएफ गैंडा प्रेग्नेंसी में कामयाबी हासिल की है। उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वर्तमान में पूरी दुनिया में महज दो ही उत्तरी सफेद गैंडे बचे हैं। सफेद गैंडे की दो अलग-अलग उप-प्रजातियां होती हैं, उत्तरी और दक्षिणी।

दक्षिणी सफेद गैंडों के साथ अपनाई गई प्रकिया:
आइवीएफ की प्रक्रिया में भ्रूण को किसी उत्तरी सफेद गैंडे में स्थानांतरित नहीं किया गया था। यह प्रकिया दक्षिणी सफेद गैंडों के साथ अपनाई गई। भ्रूण को बेल्जियम के एक चिड़ियाघर से दक्षिणी सफेद मादा के अंडे का उपयोग करके बनाया गया और ऑस्ट्रिया के एक नर के शुक्राणु के साथ निषेचित किया गया। फिर इसे पिछले साल सितंबर में केन्या में दक्षिणी सफेद सरोगेट मां में स्थानांतरित कर दिया गया, जो गर्भवती हो गई। इससे पहले गैंडों में आइवीएफ तकनीक का उपयोग पहले कभी नहीं हुआ था।
मौत से लगा झटका, गर्भावस्था ने दी उम्मीद:

कुछ दिन बाद सरोगेट मां की क्लोस्ट्रीडिया ( मिट्टी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया जो जानवरों के लिए घातक हो सकता है) से संक्रमित होने के बाद मृत्यु हो गई। सरोगेट मां की मौत से विशेषज्ञों की टीम को झटका लगा। फिर पोस्टमार्टम से पता चला कि 6.5 सेमी का नर भ्रूण अच्छी तरह से विकसित हो रहा था और उसके जीवित पैदा होने की संभावनाएं प्रबल थीं। अंत में प्रेग्नेंसी इस बात का प्रमाण थी कि तकनीक काम कर गई। वैज्ञानिकों का अगला कदम उत्तरी सफेद गैंडे के भ्रूण का उपयोग करके तकनीक को आजमाना है।
सींगों की मांग के कारण खत्म हुई जंगली आबादी :

2018 में आखिरी नर उत्तरी सफेद गैंडे, सूडान की मृत्यु होने के बाद प्रजाति लुप्त होने की कगार पर थी। फिलहाल दो मादा उत्तरी सफेद गैंडे नाजिन और उसकी बेटी फातू बचे हैं। ये दोनों ही केन्या में एक संरक्षण केंद्र में 24 घंटे कड़ी सुरक्षा में रहती हैं। लेकिन अब नई वैज्ञानिक प्रगति का मतलब है कि ये मां और बेटी अपनी प्रजाति की आखिरी जीव नहीं होंगी। उत्तरी सफेद गैंडे कभी पूरे मध्य अफ्रीका में पाए जाते थे, लेकिन गैंडे के सींग की मांग के कारण अवैध शिकार ने जंगली आबादी को खत्म कर दिया।
कई प्रयासों के बाद मिली सफलता

  • 13 प्रयासों के बाद वैज्ञानिकों के हाथ लगी सफलता
  • 70 दिनों के बाद हो गई सरोगेट मां की मृत्यु
  • 95% तक जीवित पैदा होने की संभावना थी विकसित भ्रूण की

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