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2030 से पहले आएगा 1000 बिलियन डॉलर वाले मेगाप्रोजेक्ट्स का दौर

कुछ साल पहले 10 बिलियन डॉलर या उससे अधिक की लागत वाले मेगाप्रोजेक्ट्स को बड़ा माना जाता था। लेकिन अब दुनियाभर में 100 बिलियन डॉलर से भी अधिक बजट वाले कई मेगाप्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jun 26, 2023

2030 से पहले आएगा 1000 बिलियन डॉलर वाले मेगाप्रोजेक्ट्स का दौर

2030 से पहले आएगा 1000 बिलियन डॉलर वाले मेगाप्रोजेक्ट्स का दौर

नई दिल्ली। बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए विश्व में कई मेगाप्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। लेकिन दुनियाभर में हो रहे ये निर्माण अपने बजट के मामले में चौंकाने वाले हैं। कुछ साल पहले 10 बिलियन डॉलर या उससे अधिक की लागत वाले मेगाप्रोजेक्ट्स को बड़ा माना जाता था। लेकिन अब दुनियाभर में 100 बिलियन डॉलर से भी अधिक बजट वाले कई मेगाप्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। कंस्ट्रक्शन सॉफ्टवेयर कंपनी '1बिल्ड' के मुताबिक बढ़ती महंगाई की वजह से इस दशक के अंत से पहले दुनिया में संभवत: 1000 बिलियन डॉलर से अधिक के मेगाप्रोजेक्ट्स का दौर शुरू हो जाएगा। वर्तमान में विश्व में जितने मेगाप्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, उनमें सऊदी अरब में बन रही हाईटेक सिटी नियोम, कैलिफोर्निया हाई-स्पीड रेल, मलेशिया की फोरेस्ट सिटी और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आदि प्रमुख हैं।

खाड़ी देशों में चल रहा चार बड़ी परियोजनाओं पर काम:

दुनिया के प्रमुख मेगाप्रोजेक्ट्स में से नौ का बजट 100 बिलियन डॉलर या उससेे अधिक है और इनमें से लगभग 50 फीसदी खाड़ी देशों में हैं। पिछले कुछ सालों से यूएइ और सऊदी अरब, खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए तेल के अलावा आय के नए स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मेगाप्रोजेक्ट्स आधारभूत ढांचे का विकास कर दुनिया का ध्यान आकर्षित करते हैं। ऐसे में विदेशी निवेश को बढ़ाने के मकसद से खाड़ी देशों में बड़ी-बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने और एशिया व यूरोप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी खाड़ी देशों के मेगाप्रोजेक्ट्स को खास होने की जरूरत है, जिसकी वजह से इन परियोजनाओं के बजट में वृद्धि हुई है।

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से लागत पर असर:

कोरोना महामारी, तकनीक में लगातार हो रही वृद्धि, कच्चे माल व श्रम की कीमतों में बढ़ोतरी, कुशल श्रमिकों की कमी और निर्माण के असाधारण तरीकों ने हाल के वर्षों में बड़ी परियोजनाओं की लागत को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। जैसे 2000 के दशक के अंत में वैश्विक मंदी और उसके बाद वित्तीय संकट के कारण दुबईलैंड परियोजना की शुरुआत में देरी हुई। फिर कोरोना महामारी के प्रकोप ने थीम पार्क उद्योग के लिए पूरी तरह से तबाही मचा दी। पिछले साल की शुरुआत में लगभग 17 अलग-अलग दुबईलैंड परियोजनाएं रद्द करनी पड़ीं।

ज्यादातर मेगाप्रोजेक्ट्स तय समय के बाद होते हैं पूरे:

मेगाप्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर जटिल उद्यम माना जाता है। इन्हें बनने में कई सालों का समय लग जाता है। कई सार्वजनिक और निजी हितधारक इसमें शामिल होते हैं और ये लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन है, जो 1998 में 150 बिलियन डॉलर के बजट के साथ शुरू हुआ। उस समय यह प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा मेगाप्रोजेक्ट था। हालांकि जैसे-जैसे योजना आगे बढ़ती गई, नए खंड और उपकरण जुड़ते गए इसकी लागत में भी वृद्धि हुई। अनुमान है कि 2030 में मेगाप्रोजेक्ट के पूरा होने पर स्टेशन की लागत कम से कम 230 बिलियन डॉलर होगी। मैकिंसे का अनुमान है कि 98 फीसदी मेगाप्रोजेक्ट्स की लागत 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती है। जबकि 77 प्रतिशत बड़ी परियोजनाएं कम से कम 40 फीसदी देरी से पूरी होती हैं।

विश्व की प्रमुख निर्माणाधीन बड़ी परियोजनाएं