
जंगल लगातार खो रहे कार्बन अवशोषित करने की क्षमता
लंदन। दुनिया के जंगल मानवीय गतिविधियों से बढ़ती 'अस्थिरता' के कारण कार्बन अवशोषित करने की अपनी क्षमता खो रहे हैं। नेचर पत्रिका में छपे अध्ययन के अनुसार जंगलों और अन्य प्राकृतिक वास जो अपने पेड़, पौधों और मिट्टी में कार्बन जमा करते हैं, उनकी स्थिति में गंभीर बदलाव होने की आशंका है। धरती के कई अतिसंवेदनशील स्थानों पर उच्च तापमान, जंगलों की कटाई और खेती के अल्पकालिक प्रभाव का अर्थ है कि लंबी समयावधि में वहां कार्बन भंडारों की स्थिति ठीक होने की संभावना कम है। यह स्थिति ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को घटाने के वैश्विक प्रयासों को कमजोर करती है।
आग की घटनाएं छीन रही क्षमताएं: शोधकर्ताओं ने पाया कि 1981 से 2018 तक दुनियाभर के पारिस्थितिक तंत्र विभिन्न चरणों से गुजरे। इन चरणों में पौधों की ज्यादा और कम कार्बन अवशोषित करने की क्षमता शामिल है। इस तरह उतार-चढ़ाव का स्तर अस्थिरता का बड़ा जोखिम पैदा करता है। उदाहरण के लिए अत्यधिक शुष्क और गर्म वातावरण ने कैलिफोर्निया में जंगल की आग संबंधी घटनाएं बढ़ा दी हैं। अधिक आग का मतलब है कि जंगल कभी-कभी स्थायी रूप से झाड़ियों में बदल जाता है, जिससे भूमि की वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता घटती है। यह प्रक्रिया दुष्चक्र बनाती है क्योंकि ये क्षेत्र भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होने लगते हैं।
अत्यधिक गर्म क्षेत्र सर्वाधिक जोखिम में: वे क्षेत्र सर्वाधिक जोखिम में हैं जो आमतौर पर अत्यधिक गर्म हैं, जहां अधिक फसली भूमि और वन क्षेत्र कम हैं। भूमध्यसागरीय बेसिन, उत्तर व मध्य अमरीका के पश्चिमी तट व दक्षिणपूर्व एशिया ऐसे क्षेत्र हैं, जहां जोखिम सबसे अधिक है। भूमि पर पारिस्थितिक तंत्र वर्तमान में मनुष्यों द्वारा उत्सर्जित कार्बन का एक-तिहाई अवशोषित करते हैं। यदि ये तंत्र कम कार्बन अवशोषित करना शुरू करते हैं, तो जलवायु परिवर्तन को रोकने की पृथ्वी की प्राकृतिक क्षमता घट जाएगी। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन में पहले की तुलना में और भी तेजी से कटौती करनी होगी।
तीन दशकों में दर्ज हुई व्यापक गिरावट: नेचर इकोलॉजी और इवोल्यूशन पत्रिका में तीन वर्ष पूर्व छपे शोध में भी पाया गया था कि विश्व के उष्णकटिबंधीय वन वातावरण से कार्बनडाइ ऑक्साइड को हटाने की अपनी क्षमता खो रहे हैं। उष्णकटिबंधीय वनों में कार्बन हानि का मुख्य चालक वनों की कटाई थी। बीते तीन दशकों में दुनिया के 43 फीसदी देशों ने अपने वन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की। जबकि लैटिन अमरीका और अफ्रीका में जंगलों की कटाई का स्तर सर्वाधिक उच्च था।
Published on:
25 Feb 2023 02:39 pm
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