
नई दिल्ली। विधि आयोग ने बुधवार को दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआइ और इससे जुड़े संगठनों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने की सिफारिश की है। आपको बता दें कि फिलहाल बीसीसीआइ एक निजी संस्था के तौर पर संचालित की जा रही है जो तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत काम कर रही है। इससे पहले आयोग ने कहा था कि बीसीसीआइ को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए इसे निजी से सार्वजनिक संस्था में बदला जाए या कम से कम इसे सूचना के अधिकार के दायरे में लाया जाए।
आरटीआइ के दायरे में आने के योग्य है बीसीसीआइ
सरकार से की गई सिफारिश में आयोग ने कहा है कि बीसीसीआइ आरटीआइ के दायरे में होने की शर्तों को पूरा करता है। वित्त आयोग के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान के मुताबिक, 'संविधान के अनुच्छेद-12 के तहत बीसीसीआइ इस दायरे में आने के लिए बिल्कुल योग्य है। इससे पहले 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने विधि आयोग को निर्देश दिया था कि बीसीसीआइ को आरटीआइ के तहत लाने के लिए कानूनी जरूरतों की पड़ताल करे।
...तो ये होंगे बदलाव
यदि बीसीसीआइ को लेकर सरकार यह कदम उठाती है तो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट उसके संविधान की जांच कर सकेगी। बोर्ड के फैसलों के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की जा सकेगी। इसके अलावा बोर्ड के क्रियाकलापों, खिलाड़ियों के चयन, आइसीसी या दूसरे क्रिकेट बोर्डों के साथ होने वाले अनुबंधों आदि के संबंध में भी जनहित याचिका लगाई जा सकेगी। इसके अलावा प्रसारण समेत बाकी अधिकारों की नीलामी आदि के मामले में भी पीआइएल लगाई जा सकेगी।
बोर्ड का विवादों से लंबा नाता
गौरतलब है कि बीसीसीआइ का अरबों का बजट है और इसके साथ ही कई दिग्गज राजनेता इससे हमेशा से जुड़े रहे हैं। बीसीसीआइ के साथ-साथ कई बड़े विवादों का भी नाता रहा है। आइपीएल में हाल ही में सामने आए बड़े मामलों के चलते कई दिग्गज अदालत की दहलीज तक भी पहुंचे हैं।
Published on:
18 Apr 2018 05:08 pm
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