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FIFA 2026: सुबह 4 बजे फैक्ट्री, शाम को फुटबॉल, अब विश्व कप में जर्मनी का हीरो बना डेनिज उन्दाव

FIFA World Cup 2026: डेनिज उन्दाव की कहानी संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल है। कभी फैक्ट्री में नौकरी कर रोज सुबह चार बजे उठने वाले उन्दाव आज फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी के लिए मैच जिताने वाले सुपर सब बन चुके हैं। आइवरी कोस्ट के खिलाफ उनके दो गोलों ने जर्मनी को नॉकआउट में पहुंचा दिया।

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भारत

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Anurag Animesh

Jun 23, 2026

FIFA 2026

FIFA 2026: डेनिज उन्दाव(फोटो-X/@VfB)

Deniz Undav: विश्व फुटबॉल में सितारे अक्सर बड़े क्लबों की अकादमियों से निकलते हैं, लेकिन जर्मनी के स्ट्राइकर डेनिज उन्दाव की कहानी अलग है। कुछ साल पहले तक वे एक फैक्ट्री में लेजर मशीन चलाते थे और फुटबॉल खेलने के साथ अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए रोज सुबह चार बजे उठते थे। आज वही खिलाड़ी फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी के लिए मैच जिताने वाला 'सुपर सब' बन चुका है। एक दिन पहले आइवरी कोस्ट के खिलाफ मुकाबले में दो गोल दागकर उन्दाव ने जर्मनी को नॉकआउट दौर में पहुंचाते हुए यह साबित भी कर दिया कि मेहनत और धैर्य के आगे असफलताएं ज्यादा देर टिक नहीं सकतीं।

विश्व कप में बन गए जर्मनी के संकटमोचक


विश्व कप में उन्दाव को शुरुआती एकादश में नियमित जगह नहीं मिली, लेकिन जब भी उन्हें मैदान पर उतरने का मौका मिला, उन्होंने असर दिखाया। आइवरी कोस्ट के खिलाफ 2-1 की जीत में उनके दोनों गोल निर्णायक साबित हुए। महज दो विश्व कप मैचों में तीन गोल और दो असिस्ट के साथ उन्होंने अपनी काबिलियत दिखाई। विश्व कप में किसी खिलाड़ी का बेंच से उतरकर इतने कम समय में ऐसा प्रभाव छोडऩा बेहद ही खास है।

कोच से हुई थी नोकझोंक


कुछ महीने पहले तक उन्दाव का विश्व कप टीम में स्थान भी तय नहीं माना जा रहा था। मार्च में घाना के खिलाफ अंतिम मिनट में गोल करने के बाद उन्होंने जर्मनी की शुरुआती टीम में जगह पाने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर कोच जूलियन नागेल्समान ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऐसी बातें खिलाड़ी पर अनावश्यक दबाव डालती हैं। बाद में उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए माफी भी मांगी। लेकिन उन्दाव ने मैदान पर अपने प्रदर्शन से इसका जवाब दिया।

सुबह फैक्ट्री, शाम को फुटबॉल


जर्मनी के मशहूर क्लब वर्डर ब्रेमेन ने उन्हें 14 साल की उम्र में रिजेक्ट कर दिया था। 17 साल की उम्र में उन्दाव जर्मनी की चौथी डिवीजन टीम हावेल्स से जुड़े। उस समय फुटबॉल से मिलने वाली कमाई इतनी नहीं थी कि जीवनयापन हो सके। इसलिए उन्होंने एक फैक्ट्री में नौकरी शुरू कर दी। वे रोज सुबह चार बजे उठते, फैक्ट्री में आठ घंटे काम करते, फिर ट्रेनिंग के लिए जाते और रात तक घर लौटते।

बेल्जियम से शुरू हुआ करियर का नया मोड़


लगातार संघर्ष के बाद 2020 में उन्हें बेल्जियम के क्लब यूनियन सेंट-गिलॉइस में मौका मिला। यहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और क्लब को प्रमोशन दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद बेल्जियम की शीर्ष लीग में उन्होंने 25 गोल दागे, जिसने इंग्लैंड के क्लब ब्राइटन का ध्यान उनकी ओर खींचा।

बुंदेसलीगा से विश्व कप तक


2025-26 सत्र में उन्दाव ने बुंदेसलीगा में 19 गोल किए और गोल्डन बूट की दौड़ में सिर्फ हैरी केन से पीछे दूसरे स्थान पर रहे। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने विश्व कप टीम में जगह बनाई। अब विश्व कप में जर्मनी के लिए वे काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं।

जर्मनी के 'सुपर सब'


जर्मनी के कोच नागेल्समान का मानना है कि उन्दाव मैच के दौरान परिस्थितियों को तेजी से पढ़ते हैं और बेंच से उतरते ही प्रभाव छोड़ सकते हैं। यही वजह है कि उन्हें अब तक 'सुपर सब' की भूमिका दी गई। लेकिन उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए हो सकता है कि उन्हें शुरुआती एकादश में मौका मिले।