
anurag thakur paly cricket
बीजेपी सांसद और हिमाचल क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सबसे युवा अध्यक्ष चुने गए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से तीन बार के लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने सिर्फ एक ही फर्स्ट क्लास मैच खेला और बीसीसीआई ने इन्हें दिलीप वेंगसरकर, शिवलाल यादव और ब्रजेश पटेल जैसे बड़े क्रिकेट खिलाड़ी का दर्जा दे दिया, जो अब बीसीसीआई भारतीय क्रिकेट को संवारने का काम कर रहे हैं। यह और बात है कि वेंगसरकर ने 100 से ज़्यादा टेस्ट मैच खेले हैं और अनुराग ठाकुर ने सिर्फ एक फस्र्ट क्लास मैच... वह भी सीधे कप्तान बनकर।
दरअसल मार्च माह में जो हलफनामा बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया उसके हिसाब से अनुराग वेंगसकर, शिवलाल और ब्रजेश पटेल जैसे ही बड़े खिलाड़ी रहे है।
पद भी चाहिए था और क्रिकेटर भी बनना चाहते थे
1. साल 2000 में 25 साल की छोटी से उम्र में वह अपने पिता प्रेम कुमार धुमल की छत्र छाया में हिमाचल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुन लिए गए। मगर उन्हें बीसीसीआई में कोई बड़ा पद चाहिए था और उन्हें हर हाल में प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेलना था।
2. इसलिए उसी साल अध्यक्ष रहते हुए वह एक दिन मैदान पहुंचे और ऐलान कर दिया कि वह उस मैच में न केवल टीम में खेलेंगे बल्कि वह उस टीम की कप्तानी भी करेंगे। जो बोलता, वह मरता, इसीलिए अनुराग ठाकुर जी की बात को किसी ने नहीं नकारा।
3. जम्मू-कश्मीर के खिलाफ उस मैच में वह खेले, मगर बल्ले से अपना खाता भी नहीं खोल पाए। वह 7 गेंद तक मैदान पर रहे लेकिन एक भी रन नहीं बना पाए। हालांकि गेंदबाजी में उन्होंने दो पुछल्ले बल्लेबाजों को आउट कर पूरी तरह शर्मिंदगी को बचा लिया।
4. हिमाचल प्रदेश में क्रिकेट बैकफुट पर आ गया लेकिन अनुराग ठाकुर का बीसीसीआई में सफर शुरू हो गया। अब वह प्रथम श्रेणी के खिलाड़ी बन चुके थे और इसीलिए वह पहले जूनियर क्रिकेट में चयनकर्ता बने और फिर अपने राजनैतिक रसूख के सहारे बीसीसीआई के सबसे बड़े अधिकारी बन गए हैं।
5. मार्च के महीने में जो हलफनामा बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया उसके हिसाब से अनुराग ठाकुर दिलीप वेंगसरकर, शिवलाल यादव और ब्रजेश पटेल जैसे बड़े क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं जो अब बीसीसीआई भारतीय क्रिकेट को संवारने का काम कर रहे हैं। यह और बात है कि वेंगसरकर ने 100 से ज़्यादा टेस्ट मैच खेले हैं और अनुराग ठाकुर ने सिर्फ एक फस्र्ट क्लास मैच... वह भी सीधे कप्तान बनकर।
मुश्किलों से भरे ठाकुर ने आगामी दिन
यदि लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू की जाती हैं तो ठाकुर को अनिवार्य रूप से तीन साल की अवधि तक इंतजार करना होगा। ठाकुर के लिये इस च्हॉट सीटज् पर आगामी कुछ महीने का समय सचमुच परेशानी भरा होगा क्योंकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में तेजी से बदलाव करने होंगे। लेकिन हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे ठाकुर राजनीतिज्ञ हैं और वह अपनी विशिष्ट संचालन शैली से काम करेंगे जो बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और शंशाक मनोहर से अलग होगी।
(FILE PHOTO)
Published on:
23 May 2016 12:33 am
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