
Neeraj Chopra on Arshad Nadem: पहलगाम आतंकी हमले के बाद नीरज चोपड़ा को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है। दरअसल उन्होंने देश में एक टूर्नामेंट आयोजित करने का प्लान बनाया। उन्होंने दुनियाभर के बेस्ट जैवलिन थ्रोअर्स को न्यौता दिया, जिसमें पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम भी शामिल थे। इस घटना के कुछ दिन बाद ही पहलगाम में आतंकियों ने हमला कर दिया, जिसमें से 5 आतंकी पाकिस्तान से थे और 2 कश्मीर के लोकल थे। इस घटना के बाद नीरज चोपड़ा की भी काफी आलोचना होने लगी कि उन्होंने क्यों पाकिस्तानी एथलीट को भारत में खेलने के लिए बुलावा भेजा। जिसके बाद भारतीय गोल्डेन बॉय ने चुप्पी तोड़ी और ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट कर लिखा, "मैं आमतौर पर कम बोलता हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जो गलत है उसके खिलाफ़ नहीं बोलूंगा। खासकर तब जब बात हमारे देश के प्रति मेरे प्यार और मेरे परिवार के सम्मान और प्रतिष्ठा पर हो। अरशद नदीम को नीरज चोपड़ा क्लासिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आमंत्रित करने के मेरे फैसले के बारे में बहुत चर्चा हुई है और इसमें से अधिकांश नफरत और गाली-गलौज थी। उन्होंने मेरे परिवार को भी नहीं छोड़ा। मैंने अरशद को जो निमंत्रण दिया वह एक एथलीट की ओर से दूसरे एथलीट को दिया गया था।"
नीरज ने बताया कि एनसी क्लासिक का उद्देश्य भारत में सर्वश्रेष्ठ एथलीटों को लाना और देश को विश्व स्तरीय खेल आयोजनों का घर बनाना था। पहलगाम में आतंकवादी हमलों से दो दिन पहले सोमवार को सभी एथलीटों को निमंत्रण भेजा गया था। उन्होंने आगे लिखा, "पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ है, उसके बाद एनसी क्लासिक में अरशद की मौजूदगी का सवाल ही नहीं उठता। मेरा देश और उसके हित हमेशा सबसे पहले रहेंगे। जो लोग अपने लोगों के नुकसान से गुज़र रहे हैं, मेरी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ उनके साथ हैं। पूरे देश के साथ-साथ, मैं भी जो कुछ हुआ है, उससे आहत और क्रोधित हूँ। मुझे विश्वास है कि हमारे देश की प्रतिक्रिया एक राष्ट्र के रूप में हमारी ताकत दिखाएगी और न्याय मिलेगा।"
उन्होंने कहा, "मैंने इतने सालों तक अपने देश को गर्व के साथ संभाला है, और इसलिए मेरी ईमानदारी पर सवाल उठते देखना दुखद है। मुझे दुख होता है कि मुझे उन लोगों के सामने खुद को समझाना पड़ता है जो बिना किसी अच्छे कारण के मुझे और मेरे परिवार को निशाना बना रहे हैं। हम साधारण लोग हैं, कृपया हमें कुछ और न समझाएँ। मीडिया के कुछ वर्गों ने मेरे बारे में बहुत सी झूठी कहानियाँ गढ़ी हैं, लेकिन सिर्फ़ इसलिए कि मैं नहीं बोलता, इसका मतलब यह नहीं है कि यह सच है। मुझे यह समझना भी मुश्किल लगता है कि लोग कैसे अपनी राय बदल लेते हैं। जब मेरी माँ ने एक साल पहले अपनी सादगी में एक मासूम टिप्पणी की थी, तो उनके विचारों की खूब तारीफ़ हुई थी। आज वही लोग उसी बयान के लिए उन पर निशाना साधने से पीछे नहीं हटे हैं।"
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Published on:
25 Apr 2025 11:30 am

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