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23 दिन की लड़ाई, 7 दिन वेंटिलेटर पर, फिर भी जिन्दादिली से दी कोरोना को मात

कोरोना को हल्के में लेने की भूल ना करें

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23 दिन की लड़ाई, 7 दिन वेंटिलेटर पर, फिर भी जिन्दादिली से दी कोरोना को मात

23 दिन की लड़ाई, 7 दिन वेंटिलेटर पर, फिर भी जिन्दादिली से दी कोरोना को मात

श्रीगंगानगर.श्रीगंगानगर सहित प्रदेशभर में लाखों लोग कोविड-19 से जूझ रहे हैं। अभी भी बहुत से लोग ऑक्सीजन पर हैं। कितनों को ही कोरोना ने काल का ग्रास बना दिया है लेकिन इन सब के बीच ऐसे कई लोग हैं जो अपनी इच्छाशक्ति,सकारात्मक प्रेरणा व चिकित्सा विभाग के कोरोना वॉरियर्स के प्रयासों से इस महामारी को मात देकर स्वस्थ होकर अपने घर पहुंचे है। ऐसा ही एक उदाहरण हैं हनुमानगढ़ जिले के गांव बिलोचावाला में रहने वाले सतपाल का।

सतपाल का कहना है कि 5 मई को उन्हें बुखार व खांसी की शिकायत हुई तो संभावित कोरोना के लक्षण मानते हुए चिकित्सीय परामर्श के अनुसार घर में आइसोलेट होकर इलाज लेना प्रारंभ कर दिया। तकलीफ जब बढऩे लग गई तो पहले पीलीबंगा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुआ पर तीन दिन बाद ही जिला चिकित्सालय श्रीगंगानगर में भर्ती होना पड़ा।

वहां ऑक्सीजन लगाई गई और इंजेक्शन लगने के बाद भी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। आक्सीजन लेवल 50 तक और सीटी स्कोर 25 आ गया था। इलाज के दौरान बीच-बीच में वेंटिलेटर हटाकर हाई फ्लो आक्सीजन मास्क लगाया गया। आखिरकार ईश्वर की कृपा और अपनों की दुआओं से 23 मई को स्थिति सुधरी और सीटी स्कोर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य आ गए।

इन योद्धाओं ने दिया नया जीवन

28 मई को घर पहुंचने पर मेरे घरवालों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। मुझे नई जिंदगी देने वाले चिकित्सालय के डॉ.के.के.जाखड़,डॉ.राजेंद्र गर्ग,डॉ.अनिल,डॉ.संदीप तनेजा और जान से जुटे हुए नर्सिंग स्टाफ और सफाई कर्मचारियों के प्रति मैं और मेरा परिवार हमेशा कृतज्ञ रहेगा।

कोरोना को हल्के में लेने की भूल ना करें

मेरी सभी से यही अपील है कि कोरोना को हल्के में लेने की भूल ना करें। राज्य सरकार की कोविड गाइड लाइन की पालना कठोरता से करने में ही हम सबकी भलाई है।

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