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SriGanganagar खत्री और वधवा परिवार के लिए अंतिम सफर बना अमरनाथ की यात्रा

Amarnath Yatra became the last journey for Khatri and Wadhwa family- ट्रैफिक थाना प्रभारी रहे खत्री और उनकी समधन का शव मिला, समधी समेत कई लापता

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SriGanganagar खत्री और वधवा परिवार के लिए अंतिम सफर बना अमरनाथ की यात्रा

SriGanganagar खत्री और वधवा परिवार के लिए अंतिम सफर बना अमरनाथ की यात्रा

श्रीगंगानगर।
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई। इसमें श्रीगंगानगर के यातायात थाना प्रभारी रहे सुशील खत्री और उनकी समधन सुनीता वधवा का शव मिला है। जबकि खत्री का समधी मोहनलाल वधवा सहित कई लोग लापता है। वहां बादल फटने के बाद सैलाब टैंटों के बीच से बहने लगा था। इससे श्रद्धालुओं के बीच हाहाकार मच गया। इसकी चपेट में कई लोग आ गए। राहत और बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ टीमों ने कई शवों को बाहर निकाला है। एडीएम प्रशासन डा. हरीतिमा ने बताया कि न्यू क्लॉथ मार्केट के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल वधवा, वधवा की पत्नी सुनीता रानी वधवा, वधवा के समधी ट्रैफिक थाने के सीआई रहे सुशील खत्री सहित करीब पन्द्रह-सौलह लोगों का जत्था अमरनाथ यात्रा पर गया था। बादल फटने के बाद आए मची तबाही के उस समय ये लोग चपेट में आ गए। सीआई रहे खत्री और उनकी बेटी की सास सुनीता वधवा का शव मिल चुका है लेकिन बाकी सदस्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं आई।
श्रीगंगानगर के न्यू क्लॉथ मार्केट के पूर्व सचिव राजू छाबड़ा ने बताया कि इस जत्थे के साथ गए लोगों ने सूचना दी कि खत्री और रानी वधवा का शव मिल चुका है। मोहनलाल वधवा और उसकी साली पानी में बह गए। इसके अलावा भी कई लोगों के बारे में अभी तक सूचना नहीं मिली है। इस परिवार के अन्य सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे है। देर रात अरोड़वंश समाज के कई मौजिज लोग वधवा के जी ब्लॉक िस्थत आवास पर पहुंचे।
इस हादसे में यहां जी ब्लॉक िस्थत कपड़ा व्यापारी और न्यू क्लॉथ मार्केट के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल वधवा और उसकी साली के बारे में देर रात तक कोई जानकारी नहीं मिली। दोनो बादल फटने के बाद बह गए। हालांकि वधवा की पत्नी और समधी खत्री का शव मिल चुका है। इन शवों को यहां लाने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग मांगा जा रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर प्रशासन और बचाव में जुटी टीमों के साथ परिजनों और रिश्तेदारों ने संपर्क करने का प्रयास किया है।

ज्ञात रहे कि खत्री पांच महीने पहले केसरीसिंहपुर थाने के इंचार्ज थे। इसके बाद उनको वापस यातायात थाना प्रभारी लगा दिया था लेकिन कुछ दिनों पहले वे सेवानिवृत्त हो गए। खत्री की बेटी की शादी चार माह पहले वधवा के बेटे के संग हुई थी। पांच दिन पहले वधवा और खत्री दोनों परिवारों के कई सदस्य अमरनाथ की यात्रा के लिए गया हुआ था। लेकिन यह अंतिम सफर साबित हुआ। इधर, इलाके में खत्री और वधवा परिवार के बारे में सूचना मिलने पर लोगों में खलबली मच गई। वहीं अमरनाथ लंगर सेवा समिति के पदाधिकारियों को लेकर उनके परिवार और लोग चितिंत हो उठे।
इस हादसे में यहां जी ब्लॉक िस्थत कपड़ा व्यापारी और न्यू क्लॉथ मार्केट के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल वधवा और उसकी साली के बारे में देर रात तक कोई जानकारी नहीं मिली। दोनो बादल फटने के बाद बह गए। हालांकि वधवा की पत्नी और समधी खत्री का शव मिल चुका है। इन शवों को यहां लाने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग मांगा जा रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर प्रशासन और बचाव में जुटी टीमों के साथ परिजनों और रिश्तेदारों ने संपर्क करने का प्रयास किया है।
यहां पसरा सन्नाटा
इस बीच, वधवा के घर पर देर रात अरोड़वंश समाज के पूर्व अध्यक्ष कपिल असीजा, न्यू क्लॉथ मार्केट के पूर्व अध्यक्ष राजू छाबड़ा, प्रवीण बलाना, वधवा के भाई प्रेम वधवा आदि पहुंचे। राजू छाबड़ा के बताया कि वधवा और उसकी साली के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। यह चिंता का विषय है। अन्य लोगों के बारे में पता किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मिनी मायापुरी मार्केट के क्रेन ठेकेदार नवनीत भठेजा इस परिवार के साथ अमरनाथ की यात्रा पर गया था। इस भठेजा से संपर्क किया गया है, उसने ही मृतकों के बारे में सूचना दी।
इधर, अरोड़वंश ट्रस्ट के पूर्व सचिव दीपक मिडढा ने बताया कि सुशील खत्री का मकान रिदि़ध सिदिध एन्केलव के पास मानसरोवर कॉलोनी में है। खत्री, उसकी पत्नी, बेटी और बेटा चारों के समधी वधवा परिवार के अलावा कई रिश्तेदारों का जत्था अमरनाथ यात्रा पर गए थे। खत्री की मौत की सूचना पर परिजनों में कोहराम मच गया। मिडढा के अनुसार खत्री के घर पर उनकी बहनें व अन्य रिश्तेदार हैं।
उधर, बचाव में लगी टीम का कहना था कि कई टैंट बह गए। पानी के बहाव के बीच में 30-40 टेंट आ गए थे। अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालूओं का कहना है कि नेटवर्क की भी दिक्कत सामने आ रही है। इस कारण लोग अब श्रीनगर पहुंचने लगे है।
अमरनाथ यात्रा पर गए श्रीगंगानगर के नवनीत भठेजा ने बताया कि बादल फटने की घटना शाम साढ़े छह बजे के करीब हुई। देखते ही देखते पानी अपने साथ टैंटों को बहा ले गया। कुदरत का कहर इस कदर बरपा कि बहुत से टैटों पर मलबे की दस-पंद्रह फीट मोटी परत जम गई। शवों को निकालने के लिए बचाव टीम ने जुट गई। कई शव मिलने लगे है।
अमरनाथ लंगर सेवा समिति के भंडारे के मुख्य सेवादार श्यामलाल हलवाई ने बताया कि भंडारे में ठहरे सभी यात्री सकुशल हैं। उन्होंने बताया कि हमारे से कुछ ही दूरी पर लगे मानसा के भंडारे को भारी नुकसान पहुंचा है। इस भंडारे पर अचानक भारी मात्रा में मलबा आकर गिरा जिससे भंडारे के टैंट मलबे के नीचे दब गए। मलबे के नीचे कितने यात्री और सेवादार दबे हैं इसकी कोई जानकारी नहीं। अमरनाथ में गुफा के पास श्रीगंगानगर की अमरनाथ लंगर सेवा समिति के भंडारे के सभी सेवादार और वहां ठहरे यात्री सकुशल हैं। बादल फटने के बाद गिरे मलबे और पानी से भंडारे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इसी के पास लगे मानसा के भंडारे को मलबा गिरने से काफी नुकसान पहुंचा है। उस भंडारे में ठहरे कई यात्री लापता हैं।