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सरकारी स्कूलों के वार्षिकोत्सव समारोह में बजट की टेंशन

बीरमाना. शैक्षणिक सत्र 2024-25 में सरकारी स्कूलों में मनाए जाने वाले वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का कार्यक्रम तय होने के साथ ही संस्था प्रधानों की मुश्किलें बढ़ गई है। इसका कारण है कि आयोजन को लेकर बजट को लेकर किसी प्रकार के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए है।

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बीरमाना. शैक्षणिक सत्र 2024-25 में सरकारी स्कूलों में मनाए जाने वाले वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का कार्यक्रम तय होने के साथ ही संस्था प्रधानों की मुश्किलें बढ़ गई है। इसका कारण है कि आयोजन को लेकर बजट को लेकर किसी प्रकार के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए है। जारी आदेश में आयोजन को लेकर भामाशाहों का सहयोग लेने का जिक्र जरूर किया गया है लेकिन अन्य व्यवस्थाओं को लेकर बजट प्रावधान तय नहीं हैं। जिससे संस्था प्रधान उलझन में है। वहीं इतने कम समय में वार्षिकोत्सव की तैयारी करना व भामाशाहों से सहयोग मिलना भी संभव नहीं होगा।

10 से 25 जनवरी के बीच होंगे समारोह

शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की राजस्थान राज्य वार्षिक कार्य योजना एवं बजट 2024-25 के अन्तर्गत अनुमोदित गतिविधि वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन जिले सहित प्रदेशभर के प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में 10 जनवरी से 25 जनवरी के मध्य करवाया जाएगा। समारोह के लिए जारी निर्देशानुसार पुरस्कार वितरण को लेकर पूर्व विद्यार्थियों व भामाशाह समाजसेवियों से सहयोग प्राप्त किया जाएगा। समारोह में भामाशाहों एवं दानदाताओं का सम्मान किया जाएगा। साथ ही विद्यालय के परीक्षा परिणाम के आधार पर श्रेष्ठ स्थान प्रथम व द्वितीय प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को भी सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा अब तक बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ स्थान प्रथम व द्वितीय प्राप्त करने वाले छात्र- छात्राओं का विवरण सूचना पट्ट पर अंकित होगा। आयोजन के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी निमंत्रण दिया जाएगा।

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बजट का नहीं जिक्र, टेंशन में संस्था प्रधान

वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह के आयोजन के लिए परिषद की ओर से प्रतिवर्ष टैंट व्यवस्था, माइक, फोटोग्राफी, जलपान, अल्पाहार, प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र, प्रोत्साहन सहित विविध व्यय के लिए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 5 हजार एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 10 हजार की राशि जारी की जाती है। लेकिन यह राशि एडवांस के बजाय कार्यक्रम के बाद में मिलती है। जिससे संस्था प्रधानों को उधारी में या अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। इस बार आयुक्तालय की ओर से 7 जनवरी को जारी परिपत्र में कितना बजट जारी होगा, इसका कोई जिक्र नहीं किया गया है। जिससे संस्था प्रधानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि विभाग कितना बजट जारी करेगा। अनुमानित बजट की जानकारी के अभाव में संस्था प्रधान पशोपेश में है कि आयोजन में किस प्रकार खर्च करे। परिषद ने निर्देश में भामाशाहों का भी सहयोग लेने को कहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रो में भामाशाह के अभाव में संस्था प्रधानों के लिए समारोह का आयोजन करना टेढ़ी खीर साबित होगा।

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पर्याप्त बजट जारी किया जाए

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला संगठन मंत्री हनुमान प्रसाद ने बताया कि इतने कम समय में वार्षिकोत्सव की तैयारी करना और भामाशाहों से सहयोग मिलना संभव नहीं होगा। पिछले सालों में भी बजट बहुत कम दिया गया था। बजट कम से कम 50 हजार रुपए प्रति उच्च माध्यमिक विद्यालय किया जाए। साथ ही आयोजन के समय को फरवरी तक बढ़ाया जाए। जिसमें विद्यालयों से भी सहमति ली जाए। इसके अलावा आयोजन को 5 या 10 दिन आगे पीछे करवाने के लिए छूट भी मिलनी चाहिए।