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-सफाई ठेकेदार ने वार्डों की सफाई मॉनिटरिंग टीम बनाई
श्रीगंगानगर.
शहर के बाईस वार्डों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था के लिए पार्षद एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए बार-बार नगर परिषद आयुक्त से शिकायत कर रहे हैं। लेकिन सफाई ठेकेदार पर इसका कोई असर नहीं है। वहीं सभापति व्यवस्था सुधारने की जगह आयुक्त को पत्र लिखने की नौटंकी में जुट गए है।
इस बीच सभापति अजय चांडक के निजी सहायक निखिल गांधी को ठेकेदार ने वार्ड 27-28 में सफाई सुपरवाइजर बना दिया है। सभापति वार्ड 28 से पार्षद चुने गए थे, इस वार्ड की सफाई की कमान ठेकेदार के पास है, ऐसे में ठेकेदार ने वहां की सफाई व्यवस्था के लिए सभापति के इस पीए को ही बागडोर सौंप दी है। वह सभापति के एल ब्लॉक स्थित निजी कार्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम भी कर रहा है। यानि काम सभापति के कार्यालय में करता है और मानदेय अब सफाई ठेकेदार चुकाएगा।
आयुक्त की टेबल पर पहुंची यह लिस्ट
आयुक्त सुनीता चौधरी के चैम्बर में सफाई ठेका फर्म जींद की श्री श्याम एसोसिएट से जब सफाई संबंधित जवाब मांगा गया तो उसने एक सूची उपलब्ध कराई है। इस ठेका फर्म की ओर से जारी सूची के अनुसार वार्ड एक व दो के लिए राजकुमार, वार्ड 4 में मनोज, वार्ड 16 में अनिल कुमार, वार्ड 17,18,19 व 20 में गुरजंट सिंह, वार्ड 22 व 23 में पंकज कुमार, वार्ड 24 में अभिषेक गांधी व प्रशांत कुमार, वार्ड 25 व 26 में अमरसिंह, वार्ड 27 व 28 में निखिल गांधी व शशि बाला, वार्ड 30,34 व 35 में सुरेन्द्र कुमार व विक्रम कुमार, वार्ड 45 में मांगेराम और वार्ड 46 में रिंकू कुमार को सुपरवाइजर बनाया गया है। वहीं ठेका फर्म ने राजेन्द्र पूनियां, दलीप सिंह व रवि झोरड़ को व्यवस्थापक के रूप में नियुक्त किया है।
ठेका फर्म पर इतनी मेहरबानी
श्रीश्याम एसोसिएट ठेका फर्म को पिछले साल करीब सवा दो करोड़ रुपए का ठेका दिया था, इस ठेका फर्म को शहर के सोलह वार्डों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन इस बार फिर जब सफाई ठेके लिए खुली निविदा हुई तो नगर परिषद प्रशासन ने 4 करोड़ 24 लाख रुपए में ठेका देना तय किया। राशि बढ़ाने के पीछे तर्क दिया गया कि वार्ड अब 16 के बजाय 22 वार्ड होंगे और संसाधन भी ठेकेदार के होंगे। जब निविदा खोली गई तो परिषद प्रशासन ने गुपचुप तरीके से यह ठेका 6 करोड़ 18 लाख रुपए में कर दिया गया, तब उपसभापति अजय दावड़ा व पार्षद अशोक मुंजराल ने डीएलबी में शिकायत कर दी। इस पर डीएलबी ने यह ठेका निरस्त कर दिया। दुबारा ठेका प्रक्रिया अपनाई तो भी न्यून राशि होने का आधार बताते हुए फिर इसी फर्म को ठेका दे दिया गया। इस बार यह ठेका 3 करोड़ 88 लाख रुपए सालाना दिया गया है।
ठेकेदार ने मॉनिटरिंग के लिए निखिल गांधी को सुपरवाइजर के रूप में रखा है। वह सुबह और शाम दोनों समय मॉनिटरिंग करता है। ठेकेदार ने संविदा पर रखा है, यह सही है कि यह युवक मेरे यहां कम्प्यूटर का कार्य करता है। मैंने किसी की सिफारिश नहीं की है।
- अजय चांडक, सभापति नगर परिषद
Published on:
23 Jul 2018 09:08 pm

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