श्रीगंगानगर. चहल चौक के पास कुम्हार धर्मशाला की बाइस दुकानों के आगे चबूतरों को हटाने की बजाय नगर परिषद प्रशासन ने यू टर्न ले लिया हैं। इस जिद्द पर जिला प्रगतिशील कुम्हार महासभा के जिलाध्यक्ष महेन्द्र बागड़ी अपनी कार्यकारिणी पदाधिकारियों के साथ नगर परिषद परिसर में धरने पर बैठ गए। बागड़ी के अनुसार नगर परिषद प्रशासन ने पिछले साल अंतिम नोटिस जारी किया था और इसी साल संबंधित 22 दुकानदारों को पाबंद भी किया। यहां तक कि लाल रंग के निशान लगाकर अतिक्रमण चिहि़नत किए थे। लेकिन अतिक्रमण हटाने की बजाय नगर परिषद अमला आनाकानी करने लगा है। कुम्हार धर्मशाला के मुख्य गेट के आगे अतिक्रमण को बागड़ी और उनकी टीम ने खुद हटवा दिया था लेकिन दुकानदारों ने अपने कब्जे को हटाया नहीं हैं।
बागड़ी के अनुसार अगले चौबीस घंटे में नगर परिषद प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस धरने पर पार्षद रोहित बागड़ी, सावित्री बागड़ी, पूर्व पार्षद बाल किशन कुलचानियां, मनोज कुलचानियां आदि मौजूद थे।
विदित रहे कि कुम्हार धर्मशाला ने करीब दो दशक पहले दुकानें किराये पर दी थी। इन दुकानदारों ने लोहे के सामान बनाने का काम शुरू किया, देखते देखते इस धर्मशाला की बाइस दुकानें मार्केट के रूप में विकसित हो चुकी है। कई दुकानों के आगे मुख्य नाले को दुकानदारों ने पक्के चबूतरे बनाकर अतिक्रमण कर रखा है। इस वजह से पिछले दो दशक से इस नाले की कभी सफाई तक नहीं हो पाई है। इन कब्जों को हटाने के लिए इलाके के जागरूक नागरिकों ने पहले यूआईटी प्रशासन को भी अवगत कराया था। तब यह क्षेत्र यूआईटी के अधीन था लेकिन अब यह नगर परिषद के क्षेत्राधिकार में है। पिछले सात सालों से लगातार शिकायत के बावजूद भी नगर परिषद प्रशासन ने इस अतिक्रमण को हटाया नहीं है।
इधर, नगर परिषद के एक्सईएन महावीर प्रसाद गोदारा ने बताया कि नगर परिषद प्रशासन ने अतिक्रमण चिह्तिन कर दिए लेकिन पुलिस का जाब्ता नहीं मिला हैं। दुकानदारों की संख्या अधिक होने और झगड़े की आंशका को देखते हुए पुलिस जाब्ता मांगा गया था लेकिन अब तक इस संबंध में आदेश नहीं मिले है। जैसे ही पुलिस प्रशासन की ओर से जाब्ता आएगा तो अतिक्रमण हटाने में देर नहीं लगेगी।
वहीं, चुनावी साल होने के कारण इलाके में अतिक्रमण हटाना अब टेढ़ी खीर हैं। वहीं कब्जेधारकों ने इलाके में चुनावी द्वेषता का खूब फायदा उठाया। कुम्हार समाज के जिलाध्यक्ष बागड़ी चांडक खेमे से हैं। ऐसे में उनके विरोधियों तक दुकानदारी की फरियाद पहुंच गई। इस फरियाद में अतिक्रमण को नहीं हटाने का आग्रह किया तो नगर परिषद में सिफारिश की घंटियां बज गई। नगर परिषद का पूरा अमला सक्रिय होने के बावजूद ढीला पड़ गया।