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‘मनरेगा श्रमिकों का पैसा बाबू के परिवारों के नाम ट्रांसफर’

- डायरेक्टर भांभू ने खुलासा करते हुए लगाए गंभीर आरोप

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sadharan sabha

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- डायरेक्टर भांभू ने खुलासा करते हुए लगाए गंभीर आरोप

- पन्द्रह दिन में जांच के आदेश

श्रीगंगानगर.

मनरेगा श्रमिकों का बजट ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के बाबू अपने पारिवारिक सदस्यों के बैंक खाते में ट्रांसफर कर रहे हैं। इन परिवारिक सदस्यों को मिस्त्री, मेट आदि पदों के एवज में ऑनलाइन एमआईएस कोड खोलकर भुगतान किया जा रहा है। यह आरोप जिला परिषद की बैठक में डायरेक्टर विष्णु भांभू ने लगाए। भांभू का दावा था कि वे इस संबंध में रिकॉर्ड लेकर आए हैं।


भांभू ने कहा कि एमआईएस कोडवर्ड इस्तेमाल जिला एमआईएस मैनेजर कर सकते हैं लेकिन नियमों की अनदेखी कर पासवर्ड का प्रयोग ग्राम पंचायतों और पंचायत समिति के लिपिक कर रहे हैं। । ऑनलाइन बजट खपाने के लिए बड़े पैमाने पर गडबड़ी हो रही है। इस पर जिला प्रमुख और सीईओ ने जांच कमेटी गठित कर 15 दिन में जांच का आश्वासन दिया। । सूरतगढ़ विधायक राजेन्द्र भादू और रायसिंहनगर विधायक सोना बावरी ने खड़े होकर यह मामला उठाने पर भांभू को शाबासी दी।

ऐसे उठाया भुगतान

मनरेगा श्रमिकों के गैरहाजिर होने या पलायन करने के संबंध में ऑनलाइन में बजट रिजेक्ट कर दिया जाता है लेकिन ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के लिपिक रिजेक्ट को एसेप्ट दिखाकर एमआईएस का पासवर्ड लिंक कर देते हैं। यह बजट फिर श्रमिकों के बैंक खाते में अंतरित के लिए इस्तेमाल करने योग्य श्रेणी में आ जाता है। । ऐसे में लिपिक अपने पारिवारिक सदस्यों को मिस्त्री, मेट दर्शाकर उनके खाते में राशि ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसा करने वाले करीब पौने दो सौ लिपिक हैं। इन कार्मिकों की सूची भी बनाई गई है। भांभू ने दावा किया कि उनके पास बैंक स्टेटमेंट भी हैं।

इससे पहले सदन में डायरेक्टर भांभू ने सवाल किया कि राष्ट्रीय लेवल पर हमारी जिला परिषद को सम्मानित किया गया। लेकिन हकीकत इससे जुदा है। जिला परिषद के

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