
थर्मल से रोजगार पर संकट के बादल, आंदोलन की तैयारी
सूरतगढ़ थर्मल.
ऊर्जा मंत्रालय के निर्देशों पर राजस्थान ऊर्जा विकास निगम की ओर से राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को सूरतगढ़ सुपर थर्मल की 1250 मेगावाट क्षमता का नवम्बर 2018 से अक्टूबर 2019 तक का कोयला खुली निविदा के माध्यम से अन्य बिजली संयंत्रो को बेचे जाने के निर्देशों के बाद तापीय परियोजना से जुड़े हजारो लोगों के रोजगार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सूरतगढ़ तापीय परियोजना आसपास के क्षेत्र के करीब 5000 ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों, गरीब किसानों के रोजगार का एकमात्र साधन है। इसके अतिरिक्त उत्पादन निगम के करीब 1250 अधिकारियों को अन्य परियोजनाओं में स्थानांतरित किया सकता है।
डेढ़ दशक से उत्कृष्ट प्रदर्शन
पिछले 19 वर्षों से केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित पर्यावरण एवं तकनीकी मापदंडों के अनुरूप सर्वाधिक बिजली उत्पन्न कर प्रदेश को सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाने वाले सूरतगढ़ सुपर थर्मल को देश के सर्वश्रेष्ठ बिजलीघरों में से एक माना जाता है।
250-250 मेगावाट क्षमता की छह इकाइयों वाले इस बिजली संयंत्र से रोजाना लगभग 3 करोड़ 60 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाता है। अपने शुरुआत के वर्ष 1999-2000 से 2014-15 तक बिजली उत्पादन में लगातार अग्रणी रहे सूरतगढ़ थर्मल को भारत सरकार व राजस्थान सरकार से विशेष उत्पादकता पुरस्कार मिलता रहा है।
संगठन हुए लामबद्ध
फ्लाई ऐश ब्रिक्स एसोसिएशन, ठेकेदार एसोसिएशन, टिब्बा क्षेत्र संघर्ष समिति, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, भारतीय मजदूर संघ, राजस्थान विद्युत तकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन, इंटक, सीटू सहित टिब्बा क्षेत्र के असंगठित मजदूरों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर थर्मल को सुचारू रूप से चलाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि सरकार द्वारा थर्मल की 5 इकाइयों को एक वर्ष के लिए बन्द करने से इससे जुड़े व्यवसायों एवं परोक्ष रूप से जुड़े करीब 15000 श्रमिक, ठेकेदार आदि बेरोजगार हो जाएंगे। वहीं थर्मल पर ताला लगने से टिब्बा क्षेत्र का विकास भी पूरी तरह अवरुद्ध हो जाएगा। इससे ग्रामीणों को मिलने वाला रोजगार भी बाधित होगा। इकाइयों को बन्द करने का फैसला वापिस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
Published on:
10 Jul 2018 11:30 am
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