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केसरीसिंहपुर (श्रीगंगानगर).
अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से सटे कस्बे में स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ाई हुई है। करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आलीशान भवन भले ही कस्बे की शोभा बढ़ा रहा हो लेकिन हकीकत में चिकित्सकों के अभाव के चलते मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।यह स्थिति विगत दो-तीन सालों से बनी हुई है। चिकित्सालय में डॉक्टरों के नहीं होने से अधिकांश मरीजों को श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल में रेफर करना पड़ता है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीएचसी में आपात स्थिति से निपटने की भी व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल में केसरीसिंहपुर सहित कई गांवों के हजारों हजारों लोग आते है लेकिन यहां केवल एक चिकित्सक है। खास बात ये है कि यह एक मात्र डॉक्टर भी प्रतिनियुक्ति पर है। जबकि यहां नियुक्त तीन चिकित्सक दूसरी जगह प्रतिनियुक्ति पर हैं। एक अन्य चिकित्सक को एपीओ कर दिया गया है। ऐसे में दुर्घटना, मारपीट और अन्य मामलों में आने वाले घायलों को यहां से तुरंत श्रीगंगानगर रैफर कर दिया जाता है। वहीं महिला रोग और बच्चों के कोई डॉक्टर नहीं होने से भी प्रसूताओं को दिक्कत आती है। प्रतिदिन ढाई सौ से तीन सौ मरीज अस्पताल में आते हैं। इसके बाद भी मरीजों की समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधि, चिकित्सा अधिकारी गंभीर नहीं है।
स्वीकृत पद 27, 14 पद सालों से रिक्त
यहां 2008 में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 27 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 14 पद कई सालों से रिक्त चल रहे हैं। सीएचसी में चिकित्सकों के सृजित 9 पदों में से महज एक चिकित्सा अधिकारी सारा काम संभाल रहे हैं। हाल ये है कि कोई प्रतिनियुक्ति पर चला गया तो कोई ड्यूटी पर नहीं आने के कारण एपीओ कर दिया गया। इसके चलते यहां के हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। चिकित्सा प्रभारी मरीज भी देखें और कार्यालय संबंधी कार्यों को भी अंजाम दे रहे हैं।
नाकारा पड़ी है एक्स-रे मशीन
-यहां वर्षों पुरानी एक्स-रे मशीन नाकारा पड़ी है। पुरानी मशीन की प्लेट आदि सामान उपलब्ध नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो रहा। यही हाल ईसीजी मशीन का है। इसमें रोल खत्म हो जाते हैं तो इन्हें मंगवाया ही नहीं जाता है। इसके अलावा अस्पताल में लैब टैक्नीशियन का पद सृजित नहीं होने से एक्स-रे, खून जांच आदि के लिए लोगों को महंगे दामों पर निजी क्लीनिकों में जाना पड़ रहा है।
इलाज की कहानी-मरीजों की जुबानी
निकटवर्ती गांव से जांच कराने के लिए यहां पहुंची महिला रोगी ने बताया कि अस्पताल में महिला चिकित्सक की कोई सुविधा नहीं है। छोटी-मोटी बीमारी के लिए जब भी आते हैं तो यहां डॉक्टर नहीं मिलते। ऐसे में निजी डॉक्टरों के यहां जाना पड़ता है। वहां दवाई महंगी होने से काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। अस्पताल में आए एक ओर रोगी ने बताया कि आंखों के लिए दवाई लेने आया हूं। पर्ची तो कई बार कटवा ली लेकिन न दवा मिल रही है न डॉक्टर।
इनका कहना है
मैं खुद प्रतिनियुक्ति पर हूं। अस्पताल में मरीजों सहित सारा प्रशासनिक काम देखना पड़ रहा है। चिकित्सालय में व्यवस्था पूरी नहीं होने से आपातकालीन केसों को रैफर करना पड़ता है। इन दिनों मौसमी बीमारियों की वजह से आ रहे मरीजों की बढ़ी संख्या को देखते हुए सीएमएचओ ने कार्यव्यवस्था के तहत एक एमबीबीएस डॉक्टर को इसी सप्ताह लगाया है। इतने बड़े क्षेत्र को देखते हुए यहां डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए। उच्चाधिकारियों को भी इस संबंध में अवगत कराया है।
- डॉ. अजायब सिंह बराड़, चिकित्सालय प्रभारी अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र केसरीसिंहपुर
- चिकित्सालय में व्यवस्था बिगड़ी हुई है, इससे कस्बे के लोगों को दिक्कत आ रही है। सरकार को यहां चिकित्सकों की नियुक्ति करनी चाहिए।
- कालूराम बाजीगर, पालिकाध्यक्ष, केसरीसिंहपुर
Updated on:
13 Sept 2017 08:29 pm
Published on:
13 Sept 2017 08:23 pm
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