आवासीय की स्वीकृति की आड़ में व्यावसायिक भवनों का निर्माण

Construction of commercial buildings under the guise of acceptance of residential- नगर परिषद को हर बिल्डिंग से औसतन बारह लाख रुपए राजस्व का चूना.

By: surender ojha

Updated: 21 Jul 2021, 12:54 PM IST

श्रीगंगानगर.शहर में जहां देखो वहां भवन निर्माण कार्य चल रहा है। भूमिगत और बहुमंजिला निर्माण के लिए नगर परिषद से अनुमति सिर्फ आवासीय भवन निर्माण की ली गई है जबकि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक हो रहा है। इससे शहर का स्वरूप बिगडऩे लगा है।

इन कॉमर्शियल भवन मालिकों ने पार्किंग की जगह तक नहीं छोड़ी है। ऐसे में शहर की सडक़ों पर ही वाहनों की लंबी कतार लगने लगी है। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। वहीं नगर परिषद को आवासीय से व्यावासयिक भवन इस्तेमाल करने से भू उपयोग परिवर्तन शुल्क के रूप में राजस्व की भी हानि हुई है।

शहर में कॉमर्शियल भवन के लिए एनओसी दी जाती तो नगर परिषद को प्रत्येक बिल्डिंग सेऔसतन बारह लाख रुपए का राजस्व मिल सकता था लेकिन एेसा नहीं हुआ है। इस कारण नगर परिषद का खजाना खाली है।

सबसे ज्यादा कॉमर्शियल भवनों का निर्माण ब्लॉक एरिया, जवाहरनगर और पुरानी आबादी में अधिक हो रहा है। स्वायत्त शासन विभाग ने पहले भी कई बार निर्देश दिए थे कि स्थानीय निकायों को अपनी आय का स्त्रोत खुद निकालना होगा। इसके बावजूद नगर परिषद प्रशासन ने आय बढ़ाने की वैकल्पिक व्यवस्था की बजाय नियम कायदों की अनदेखी कर दी।

नगर परिषद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। शहर के मुख्य मार्गो पर बहुमंजिला भवन बनने के बावजूद कॉमर्शियल गतिविधियों के संबंध में जांच नहीं की जाती। यही वजह है कि जब बिल्डिंग का निर्माण हो जाता है तो एनओसी लेने के लिए नगर परिषद में फाइल जमा होती है।

तब तक भवन बनाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी होती है। एेसे में सिर्फ संबंधित भवन तोडऩे का विकल्प बचता है। लेकिन नगर परिषद ने पिछले दो दशक से एक भी भवन को गैर कानूनी नहीं बताते हुए उसे तोड़ा तक नहीं है।

इधर, परिषद के अधिकारियों की माने तो सिफारिश नियम कायदों पर अधिक हावी है। इस कारण चाहकर भी संबंधित भवन को सीज तक नहीं कर सकते।
करीब चार साल पहले नगर परिषद के तत्कालीन सभापति अजय चांडक ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोला था।

यहां तक कि तत्कालीन आयुक्त और राजस्व अधिकारी के खिलाफ डीएलबी और स्वायत्त शासन मंत्री तक शिकायतों का अंबार लगा दिया था। इस शिकायत में आरोप लगाया था कि परिषद के अधिकारियों और चंद कर्मचारियों ने मिलकर 45 भवनों के निर्माण की अनुमति आवासीय दी गई जबकि इन भवनों का इस्तेमाल कॉमर्शियल गतिविधियों करने के लिए किया जा रहा है।

नक्शे बनाने के लिए नगर परिषद के अधिकृत सर्वेयर की रिपोर्ट की बजाय बाजार से प्राइवेट सर्वेयर की रिपोर्ट को तवज्जो दी गई।

यहां तक कि जिन गलियों में बहुमंजिला और कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए भवन का निर्माण पर नियमों में रोक है, इसके बावजूद निर्माण की अनुमति दी गई। लेकिन तब राजनीतिक द्वेषता के कारण तत्कालीन सभापति की शिकायतों की अनदेखी कर दी गई थी।
इलाके में आठ भवन मालिकों को नगर परिषद ने अप्रेल के अंतिम सप्ताह में नोटिस दिए थे। लेकिन अब तक इन भवन मालिकों की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। पूर्व मंत्री राधेश्याम गगानगर आवास वाली रोड पर तीन कॉमर्शियल भवनों का निर्माण हो चुका है। इसके अलावा दो भवन पी औरजी ब्लॉक में है।

इधर, नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में लॉक डाउन लग गया था, इस कारण इन नोटिस पर कार्रवाई नहीं हो पाई। अब दुबारा नोटिस देकर जवाब तलब किया जाएगा।

इस बीच एच ब्लॉक, मुकर्जीनगर, आदर्शनगर एरिया एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो चुका है। केन्द्रीय बस स्टैण्ड नजदीक होने के कारण शहर के अधिकांश कोचिंग सैँटर इन इलाके में संचालित हो रहे है। वहीं हॉस्टल भी काफी खुल चुके है। इसके साथ साथ दुकानें भी संचालित हो रही है।

संकरी गलियों में कॉमर्शियल गतिविधियों की अनुमति नगर परिषद प्रशासन नगर पालिका एक्ट के तहत नहीं दे सकती। इस कारण भवन मालिक सिफारिश का जुगात करते है।

नगर परिषद के एक अफसर के अनुसार जनप्रतिनिधियों के अलावा जयपुर के उच्चाधिकारी सिफारिश करने के लिए फोन करते है। एेसे में चाहकर भी सख्त कार्रवाई नहीं कर सकते।

surender ojha Reporting
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