
सूरतगढ़. साइबर अपराधी लगातार हाइटेक होते जा रहे हैं। ये अपराधी साइबर फ्रॉड के नये-नये हथकंड़ों के साथ आजकल एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का दुरूपयोग कर लोगों की फोटोज के साथ छेड़छाड़ व आपत्तिजनक बनाकर उनको ब्लैकमेल करते हैं। साइबर अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता व सुरक्षा उपाय अपनाना है। यह बात बुधवार को राजस्थान पत्रिका के रक्षा कवच अभियान के तहत बार संघ राजस्व रूम में आयोजित जागरूकता कार्यशाला में सदर पुलिस थाना के साइबर एक्सपर्ट कांस्टेबल सूर्यप्रकाश ने कही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सदर थाना प्रभारी रामकुमार लेघा मौजूद रहेए जबकि अध्यक्षता बार संघ राजस्व के अध्यक्ष धनवीर सिंह हुंदल ने की। साइबर एक्सपर्ट सूर्यप्रकाश ने बताया कि अधिकतर साइबर फ्रॉड होने का कारण अनजान एपीके फाइल या एनी डेस्क जैसी संदिग्ध एप को डाउनलोड करना है। इसे डाउनलोड करते ही व्यक्ति के मोबाइल का समस्त डाटा हैकर के पास चला जाता है। जिसका ओटीपी भी संबंधित व्यक्ति के पास नहीं बल्कि हैकर के पास जाता है। एसबीआई की योनो एप को हैक कर साइबर अपराधी खाताधारक के खाते से लोन तक उठा लेते हैं।
साइबर पुलिस ने बताया कि आजकल खाता होल्ड होने की शिकायतें बहुत आ रही हैं। कभी भी लालच में आकर किसी अंजान खाते में रुपए नहीं डलवाएं और न ही लेने चाहिए। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग या अन्य पैसा कमाने की साइट्स या एप का उपयोग नहीं करें। अन्यथा पुलिस की साइबर विंग या बैंक संदिग्ध साइबर फ्रॉड के लेनदेन की आशंका में खाता होल्ड कर सकते हैं। व्यापारी व प्रोफेशनल लोग अपने सेविंग अकाऊंट या उससे जुड़ी जी-पे, फोन पे, पेटीएम जैसी एप्स से लेनदेन नहीं करें। ये एप्स बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा नहीं है, यह केवल कियोस्क की तरह ही काम करती हैं। इसलिए लेनदेन के लिए चालू खाते का ही उपयोग करें। साथ ही बड़े लेनदेन आरटीजीएस या नगद में करने चाहिए।
साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि संदिग्ध फ्रॉड लिंक व एप की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने प्ले स्टोर पर एम-रक्षा कवच 2 नाम की एप जारी कर रखी है। हर व्यक्ति को यह एप अपने मोबाइल में रखनी चाहिए। यह एप मोबाइल को स्कैन कर ऐसी एप्स जो कि आपके फोन का एक्सेस दूसरे प्लेटफार्म को देती हैए उसको रोक देती है। फेसबुकए व्हाट्स एप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल एप का उपयोग भी सावधानी के साथ करना चाहिए। यदि कोई इन एप को हैक करता है तो, संबंधित थाना के साइबर सेल में जानकारी देकर आईडी बंद करवाई जा सकती है। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत बैंक में सूचना देकर अपना खाता फ्रीज करवाएं और भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं। साथ ही संबंधित पुलिस थाना को सूचित करें।
सदर थानाधिकारी रामकुमार लेघा ने कहा कि वर्तमान में सबसे ज्यादा मामले साइबर संबंधित बढ़ रहे हैं। रुपयों के लेन देन के कार्योंं में सजगता रखने की जरूरत है। साइबर ठग आमजन को प्रलोभन देकर फंसाते है तथा बैंक खातों को एक झटके में ही क्लीन कर देते हैं। अनजान व्यक्ति को रुपए का लेनदेन मोबाइल से ना करें तथा प्रलोभन वाले ऐप से दूरी बनाकर रखे। किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो इसके लिए आमजन को साइबर क्राइम हेल्पलाइन नम्बर 1930, साइबर वेबसाइट साइबर क्राइम डॉट गोव डोट इन पर शिकायत भेज सकता है अथवा समीपवर्ती पुलिस थाना में भी रिपोर्ट दर्ज करवाई जा सकती है। उन्होंने राजस्थान पत्रिका के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि साइबर अपराध के लिए सबकों जागरूक होने की जरुरत है। तभी साइबर ठग पुलिस के हत्थे चढ़ सकेंगे।
बार संघ राजस्व अध्यक्ष धनवीर सिंह हुंदल ने बताया कि वर्तमान में सोशल मीडिया का जमाना है। साइबर ठग ऐसे प्लेटफॉर्मों पर सक्रिय होकर कार्य कर रहे हैं। वही, ऑनलाइन शॉपिंग अथवा झूठे फोन कॉल करके आमजन को फंसाते हैं। इसके बाद आमजन बिना किसी को सूचना अथवा सलाह लिए बिना उनके बैंक खाते में रुपए ट्रांसफर कर ठगी का शिकार बन जाता है। संदिग्ध ई मेल और लिंक से बचें, संदिग्ध ईमेल और लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि वे मैलवेयर या फिशिंग हमलों का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में साइबर ठगों से बचने के लिए सभी को जागरुक होने की जरूरत है। आमजन किसी भी प्रलोभन में ना आए तथा साइबर ठगों से सावधान रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम सुंदर चाण्डक ने बताया कि आमजन को रुपए की लेन देन के लिए अलग अलग बैंक खातें रखने चाहिए। इससे भी साइबर ठगी से बचा जा सकता है। गत चार सालों में साइबर अपराध की गति बढ़ती जा रही है। मोबाइल के माध्यम से रुपए का आदान प्रदान हो रहा है। ऐसे में ठग गिरोह के रुप में सक्रिय होकर कार्य कर रहा है तथा आमजन के बैंक खातों से लाखों रुपए पार कर रहा है। साइबर अपराध से बचने के लिए जागरुक होकर कार्य करने की जरूरत है।
अधिवक्ता रामस्वरूप बारूपाल ने बताया कि साइबर अपराध से आमजन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में पीडि़त को मानसिक परेशानी से भी गुजरना पड़ता है। साइबर ठग तकनीकी के मामले में सबसे आगे है। मोबाइल के इस्तेमाल करते समय सावधानी बरती बहुत आवश्यक है। कई बार हम अनजाने में किसी लिंक को लाइक करते है, तो भी हमारे बैंक खातें से साइबर ठग सभी राशि ट्रांसफर कर लेता है। इसलिए किसी भी लिंक को लाइक ना करें। ऐसे मामलों में बचाव ही सुरक्षा है।
अधिवक्ता सूरज कुमार स्वामी ने कहा कि जिले में साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। त्योंहार के समय में तो आमजन ऑलनाइन शॉपिंग करता है, लेकिन अक्सर साइबर ठग ऐप के माध्यम से सामान के बदले रुपए ऐप के माध्यम से अपने बैंक खातों में डलवा लेते हैं। इसके बाद आमजन अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। साइबर ठगी से बचने के लिए ऑललाइन शॉपिंग करना बंद करने की जरुरी है। आमजन को साइबर ठगों से सावधानीपूर्वक बचाव करने की आवश्यकता है। तभी समाज साइबर अपराध मुक्त हो सकेगा।
अधिवक्ता आनंद स्वामी ने कहा कि साइबर अपराध से बचने के लिए समय समय पर मोबाइल का पासवर्ड समय समय पर बदलते रहे। ऑनलाइन खातों के लिए सुरक्षित पासवर्ड का इस्तेमाल करें। अनजान नम्बरों से आए मैसेज अथवा कॉलिंग व्यक्ति को ओटीपी नम्बर ना बताए। साइबर ठग आमजन को मोबाइल फोन करके ओटीपी नम्बर लेकर उनके ऑनलाइन बैंक खाते कुछ ही क्षणों में खाली कर देते हैं। ऐसे लोगों को अपना ओटीपी नम्बर कभी ना बताए।आमजन नियमित रूप से अपने खातों की जांच करें, अपने बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड की नियमित रूप से जांच करें ताकि किसी भी अनधिकृत लेनदेन का पता लगाया जा सके।
अधिवक्ता लेखराज देरासरी ने बताया कि साइबर अपराध के बारे में आमजन को सही ढग़ से जानकारी नहीं है। राजस्थान पत्रिका की ओर से साइबर ठगी को लेकर चलाए जा रहे अभियान के माध्यम से आमजन जागरूक हो रहा है। ऐसे कार्यक्रम समाज को सजग करने का कार्य कर रहे हैं। साइबर अपराध की चपेट में अनपढ़ ही नहीं बल्कि पढ़े लिखे व सरकारी कर्मचारी भी आ रहे हैं। ऐसे में सावधानी रखने की आवश्यकता है।इसलिए पुलिस के सहयोग से साइबर अपराध पर अकुंश पाया जा सकता है।
Updated on:
26 Oct 2025 06:35 pm
Published on:
30 Jan 2025 04:06 pm
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