
बीरमाना. आज के डिजिटल युग में, इंटरनेट और स्मार्ट फोन्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई पेमेंट्स पर निर्भरता लगातार बढने से साइबर अपराध भी बढऩे लगे हैं। साइबर अपराधियों के द्वारा उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा, वित्तीय जानकारी और गोपनीयता को खतरे में डालने वाले कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसलिए साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता और जागरूकता बढ़ाने के लिए राजस्थान पत्रिका की ओर से चल रहे रक्षा कवच अभियान के तहत बुधवार को बीरमाना के राजकीय महाविद्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें साइबर सुरक्षा से जुड़े एक्सपर्ट लोगों ने विद्यार्थियों को मोबाइल का सही उपयोग करने की सीख दी।
कार्यक्रम में साइबर एक्सपर्ट कानाराम शर्मा ने बताया कि इन अपराधों से बचने के लिए जरूरी है कि अनजान कॉल से बचें और उन्हें नहीं उठाएं। उन्होंने कहा कि लालच और डर दो प्रकार से साइबर अपराध बढ़ता है। इसके लिए जागरूक रहना बहुत जरूरी है। वहीं आजकल डिजिटल अरेस्ट यानि गिरफ्तारी के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे है लेकिन ऐसा कभी होता ही नहीं है। ये भी एक साइबर अपराध का प्रकार है। अक्सर भोले- भाले लोग इसका शिकार हो जाते हैं। साइबर अपराध से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है कि अपनी ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्कता और जागरूकता रखी जाए। अगर हम सभी मिलकर इन सावधानियों का पालन करें, तो साइबर अपराधों से बचाव संभव हो सकता है और एक सुरक्षित डिजिटल दुनिया का निर्माण किया जा सकता है। वर्तमान में साइबर ठगी से बचने की जरूरत है।
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सहायक आचार्य नरेन्द्र कौर ने बताया कि आमजन को चाहिए कि वित्तीय लेन-देन तथा मोबाइल की उपयोगिता को लेकर सावधानी बरतें। ओटीपी-पिन-सीवीवी नंबर सांझा न करें। नाम मोबाइल नंबर, जन्मतिथि को पासवर्ड न बनाएं। ऑनलाइन अकाउंट-नेट बैंङ्क्षकग के अल्फान्यूमेरिक स्पेशल कैरेक्टर के साथ जटिल पासवर्ड रखें। राजस्थान पत्रिका के इस अभियान से जागरूकता की अलख जगी है।
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सहायक आचार्य मनोज सुथार ने बताया कि साइबर अपराधों व ठगी से बचने का सबसे बड़ा रक्षात्मक उपाय है कि अपरिचित कॉल नहीं उठाएं। इसके लिए आप पहले उसकी पहचान करें। इसके अलावा अनजान लोगों के वीडियो कॉल भी नहीं उठाने चाहिए। साथ ही अनजान ङ्क्षलक पर क्लिक नहीं करें। ऐसा करने से साइबर अपराध से बचा जा सकता है। समस्या आने की स्थिति से पुलिस से भी सम्पर्क किया जा सकता है।
सहायक आचार्य सत्यप्रकाश पूनिया ने बताया कि साइबर अपराधों से बचने के लिए हमें खुद सचेत होना होगा। अनचाहे कॉल व मैसेज से बचना होगा। मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ओटीपी व पासवर्ड किसी को भूल से भी नहीं दें, अन्यथा साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। पत्रिका का साइबर सुरक्षा को लेकर अभियान सराहनीय है।
सहायक आचार्य अमरजीत सिंह ने बताया कि साइबर अपराधों व ठगी से बचने के लिए सबसे पहला कदम है खुद सावचेत होना। साथ ही परिवार के प्रत्येक सदस्य व आस पडोस के लोगों को भी हमें साइबर काइम को लेकर जागरूक करना होगा। तभी साइबर ठगों के मकडज़ाल से बचना संभव है। ऑनलाइन लेनदेन व एटीएम उपयोग के दौरान विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए।
Published on:
17 Jan 2025 06:09 pm
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