श्रीगंगानगर. राइट टू हेल्थ बिल को वापस लेने की मांग को लेकर ऑल राजस्थान प्राइवेट हॉस्पिटल्स संघर्ष समिति की ओर से सोमवार को जयपुर में विधानसभा पर प्रदर्शन के दौरान चिकित्सकों पर लाठीचार्ज किया गया। पुलिस की लाठीवार से श्रीगंगानगर के आईएमए अध्यक्ष डा.सुभाष राजोतिया और सचिव डा. हरीश रहेजा के मामूली चोटें आई हैं। इस लाठीवार को लेकर इलाके के प्राइवेट चिकित्सकों में रोष हैं। इन चिकित्सकों का कहना है कि सरकार वार्ता करने की बजाय डॉक्टरों को भयभीत करने के लिए जानबूझकर लाठीचार्ज करवा रही हैं। लेकिन चिकित्सक समुदाय झुकेगा नहीं।
इधर, आईएमए जिलाध्यक्ष राजोतिया के अनुसार ऑल राजस्थान प्राइवेट हॉस्पिटल्स संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलना चाहता था लेकिन सीएम जोधपुर के दौरे पर होने के कारण स्वास्थ्य केन्द्र प्रसादीलाल मीणा से वार्ता करने के लिए पहुंचा। इस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने राइट टू हेल्थ बिल में संशोधन के बारे में सुझाव मांगे तो पदाधिकारियों ने इस बिल को किसी भी रूप से स्वीकार करने से इंकार कर दिया। चिकित्सकों की दो टू की बात सुनने के बाद यह वार्ता स्थगित हो गई। उन्हेांने बताया कि सीएम गहलोत सोमवार रात को जयपुर आ रहे है, ऐसे में वार्ता फिर से शुरू होने के आसार हैं। श्रीगंगानगर से साठ चिकित्सकों की टीम जयपुर पहुंची और प्रदर्शन में शामिल हुई।
इधर, श्रीगंगानगर जिले में तीसरे दिन सोमवार को भी निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा ठप रही। चिकित्सकों और अस्पताल संचालकों ने बंद रखकर अपना विरोध जताया। जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले के 78 निजी अस्पतालों पर ताले लगने से रोगियों को मायूसी हाथ लगी।
इधर, राजकीय जिला चिकित्सालय के पीएमओ डा.केएस कामरा ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों से रोगी राजकीय जिला चिकित्सालय उपचार कराने पहुंचे। उन्हेांने बताया कि इमरजेंसी में विशेष व्यवस्था तैयार की गई हैं।
इस बीच, आईएमए के पूर्व जिलाध्यक्ष डा.बृजमोहन सहारण के अनुसार चुनावी वर्ष में राज्य सरकार प्रदेश में झूठे वायदे कर स्वास्थ्य व्यवस्था को तोड़ना चाहती है। पूरे प्रदेश में चिकित्सक हड़ताल पर हैं। राइट टू हेल्थ बिल केवल सुनने और पढ़ने में अच्छा है लेकिन निजी हस्पतालों की कमर तोड़ने वाला और जनता को गुमराह करने वाला ज्यादा हैं। सरकार ने ये मान लिया कि वह सरकारी हस्पताल में रोगी को इलाज की गारंटी नहीं दे सकती। जहां सभी सुविधाएं हो उन अस्पताल से सहमति के आधाार पर अनुबंध करें तभी इस बिल का आमजन को फायदा होगा। वोटों की ख़ातिर सरकार हठधर्मिता की बजाय सकारात्मक वार्ता करें तो अच्छा संदेश जाएगा।