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ब्रह्म कॉलोनी में बदहाली बरकरार: सीवर खुदाई के बाद सडक़ें छलनी, जीर्णोद्धार को तरसे लोग

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Due to the disaster in Brahma colony: people sneaking on the road

ब्रह्म कॉलोनी में बदहाली बरकरार: सीवर खुदाई के बाद सडक़ें छलनी, जीर्णोद्धार को तरसे लोग

श्रीगंगानगर। बसंती चौक के पास ब्रह्म कॉलोनी में चकाचक सडक़ें अब सपना बनकर रह गई है। इस कॉलोनी में सीवरेज प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में छह माह पहले सीवर लाइनें बिछाई तब सडक़ों को तोड़ा गया लेकिन इनका जीर्णोद्धार अब तक नहीं हो पाया है।

ब्रह्म कॉलोनी की मुख्य रोड खेत की पगडंडी का रूप ले चुकी है। वहीं गली नम्बर तीन में सीसी रोड को दुरुस्त कराने के लिए ठेका कंपनी एल एंड टी कंपनी ने रेडीमेड बैरीकेट्स रखकर मोहल्लेवासियों को आश्वासन दिया था लेकिन गत चार महीने से कोई भी कारीगर इस गली में नहीं आया। लोगों को अब भी टूटी सडक़ों से अपनी घरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

इधर, कॉलोनी की एक गली में कई श्रमिक सीवर कनैक्शन के नाम पर पूरी गली को खोदने में लगे थे। इस गली में भी आवाजाही का रास्ता अवरूद्ध को गया है। पत्रिका टीम ने जब इस कॉलोनी की सीवर समस्याओं के संबंध में मोहल्लेवासियों से फीडबैक लिया तो लोगों का गुस्सा जुबां पर आ गया।

कई लोगों ने इस सीवर सिस्टम के कंट्रोल पर ही सवालियां निशान लगा दिए तो वहीं कईयों का कहना था कि जब ठेका कंपनी के पास संसाधन ही नहीं है तो यह ठेका ही क्यों और किस आधार पर दिया गया है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
सीवरेज के कारण जर्जर हो चुकी सडक़ों पर अब नगर परिषद के सफाई कार्मिक भी नहीं आते है। मिट्टी और कीचड़ में तब्दील हो चुकी गलियां में अब गंदा पानी पसरा रहता है। नालियां भी इस सीवर खुदाई में टूट चुकी है। इस कारण मच्छरों की भरमार हो गई है।

कचरे उठाव की ट्रेक्टर ट्रॉलियां इस इलाके में नहीं आती है। बसंती चौक से इस कॉलोनी में आने से टैम्पू चालक भी कतराने लगे है। लोग मजबूरन बसंती चौक तक अपने वाहन खड़े करने को मजबूर हो गए है।
इस कॉलोनी में सीवरेज के कारण हो रही अव्यवस्थाओं के संबंध में जब जिला कलक्टर ने निरीक्षण किया तब लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी।

तब कलक्टर ने ठेका कंपनी और आरयूआईडीपी के अधिकारियों को हर हाल में व्यवस्था में सुधार की घुडक़ी भी दी लेकिन तीन महीने बीतने के बावजूद इसका असर नहीं दिखा है। सीवर प्रभावित इस इलाके में पानी की पाइपें कई बार टूट चुकी है, इसे दुरुस्त कराने के लोग खुद अपनी जेब ढीली करने को मजबूर है।

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