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रेत से दबी फसलें, मैदान की तरह हुए खेत

- नरमा-कपास और ग्वार की फसल प्रभावित

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श्रीगंगानगर.

जिले में चार-पांच दिन से चल रही धूलभरी हवाओं से फसलों को नुकसान होने लगा है। छोटी फसल रेत में दब गई और खेत मैदान की तरह दिखने लगे हैं। बिजाई किए गए रकबे में पौधों के लिए बनाई गई पंक्ति (खूड) में रेत जमा हो रही है।

आंधी के कारण नरमा, कपास, ग्वार और हरे चारे की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों की मानें तो नरमा और कपास की बढ़ोतरी रुक गई है। वहीं हरा चारा रेत के कारण झुलसने लगा है। किसान कृष्णलाल स्वामी का कहना है कि उनके यहां तीन बीघा में नरमा और एक बीघा में कपास का बिजान किया हुआ है, पत्तों पर रेत जमने से फसल का रंग बदल गया है। अब अगर तेज धूप पड़ी तो फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।

झुलसने लगा हरा चारा

आंधी से हरे चारे को भी नुकसान हो रहा है। पत्तों पर रेत पडऩे के चलते बढ़ोतरी रुक गई और फसल झुलसने लगी है। हरे चारे की फसल की गर्मी में बढ़वार कम रहती है। ऐसी स्थिति में उस पर आंधी आने से और भी नुकसान हो रहा है। फिलहाल खेतों में एक से चार फीट तक की हरे चारे की फसल है। रेत से यह फसल झुलस गई है।

ग्वार का एमएसपी निर्धारित करने की मांग

श्रीगंगानगर. गेहूं, चना और सरसों के बाद अब ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करवाने की मांग किसानों ने की है। जय किसान संगठन से जुड़े किसानों ने इस संबंध में शुक्रवार को जिला कलक्टर से मुलाकात की।

इनका कहना था कि राजस्थान की मुख्य फसल ग्वार है, ऐसे में प्रत्येक किसान इससे सीधा जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार को ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर किसानों के हित में फैसला करना चाहिए। हमारे यहां गेहूं ,चना तथा सरसों आदि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित हो चुका है। संगठन के रमन रंधावा ने कहा कि ग्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5500 रुपए घोषित होना चाहिए। अनिल गोदारा, अंग्रेज बराड., विनोद जाखड़, राजेश भारत, विजय कृष्ण कौशिक, हरीश कपूर, बॉबी पहलवान, कुलजीत सिंह आदि साथ थे।

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