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देशभर में फैल रही गंगानगरी गुलाब की खुशबू

श्रीगंगानगर.गंगानगरी किन्नू के देश-विदेश में पहचान बनाने के बाद अब गंगानगरी लाल गुलाब की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही है। परम्परागत फसलों की तुलना में इससे ज्यादा कमाई होने के कारण किसानों का रुझान लगातार इसकी खेती की तरफ बढ़ता जा रहा है। दो-ढाई दशक पहले जहां श्रीगंगानगर जिले में गुलाब की खेती का रकबा […]

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श्रीगंगानगर.गंगानगरी किन्नू के देश-विदेश में पहचान बनाने के बाद अब गंगानगरी लाल गुलाब की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही है। परम्परागत फसलों की तुलना में इससे ज्यादा कमाई होने के कारण किसानों का रुझान लगातार इसकी खेती की तरफ बढ़ता जा रहा है। दो-ढाई दशक पहले जहां श्रीगंगानगर जिले में गुलाब की खेती का रकबा पांच-दस बीघे था, वहीं आज दो-ढाई हजार बीघे में इसकी खेती होने लगी है। उद्यान विभाग गुलाब की खेती पर अनुदान भी देता है।पंजाब से सटे श्रीगंगानगर जिले में नरमा-कपास, गेहूं और सरसों जैसी परम्परागत फसलों की खेती के साथ बागवानी की शुरुआत हुई तो यहां का किन्नू देश की सरहद लांघ विदेशों तक पहुंच गया। अब गंगानगरी गुलाब अपने सुर्ख रंग और खुशबू की बदौलत राजस्थान के साथ-साथ कई राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। प्रति बीघा में होने वाले उत्पादन से परंपरागत फसलों की तुलना में ज्यादा कमाई होने और भुगतान तुरंत मिलने से किसान इसकी खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

अनुकूल है सब कुछ

गुलाब की खेती के लिए श्रीगंगानगर जिले की जलवायु और मिट्टी दोनों अनुकूल है। यही वजह है कि यहां का गुलाब पुष्कर के गुलाब से कम नहीं है। नहरी पानी की उपलब्धता गुलाब की खेती के लिए सोने पर सुहागा साबित हुई है। गेहूं और नरमा-कपास की फसल पर किसान जितना खर्चा उर्वरक और कीटनाशक पर करता है, उसकी तुलना में यह खर्चा नाममात्र होने से गुलाब की खेती की उत्पादन लागत कम बैठती, जिससे किसान को इसकी खेती घाटे का सौदा साबित नहीं हो रही। गंगानगरी गुलाब का उपयोग गुलकंद, शरबत, गुलाब जल के साथ औषधियों के निर्माण में हो रहा है।

इन राज्यों में है मांग

गुलाब के फूलों की मांग पंजाब व हरियाणा राज्यों में अच्छी खासी है। इसकी सूखी पत्तियां दिल्ली और पुष्कर जाती है। गंगानगरी गुलाब की मांग बढऩे से कई किसान इनकी कलम भी तैयार करने लगे हैं। राजस्थान में जयपुर, पुष्कर, चित्तौडग़ढ़ व भीलवाड़ा सहित कई जगह इसकी अच्छी मांग है। गुलाब की खेती करने वाले किसान यहां तैयार कलम हाथोंहाथ ले जाते हैं।

गुलाब की खेती लाभकारी सौदा

गुलाब की खेती लाभकारी सौदा है। मैंने दो-ढाई दशक पहले पांच बीघा में गुलाब की खेती शुरू की थी। आज 150 बीघा में इसकी खेती कर रहा हूं। उत्पादन लागत कम होने से साल भर में एक बीघा की खेती से ढाई से तीन लाख तक की कमाई हो जाती है। गुलाब की कलम की मांग को देखते हुए अब यह काम भी शुरू कर दिया है। एक बीघा में तैयार कलम की बिक्री से सात लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है।

कृष्ण भांभू, प्रगतिशील किसान

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