
With mother remain in jail newborn
श्रीगंगानगर.
चार साल पहले गोलूवाला की एसबीबीजे शाखा में किसानों के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत फर्जी तरीके से ऋण उठाने की आड़ में साढ़े तीन करोड़ रुपए का घोटाला करने के जुर्म में बैंक के तत्कालीन उपशाखा प्रबंधक को सात साल कठोर कारावास व पचास हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया है। यह निर्णय भ्रष्टाचार निवारण प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार शाम को सुनाया। इस मामले में तत्कालीन बैंक शाखा प्रबंधक सहित चार बैंक कर्मियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
गोलूवाला पुलिस थाने में एसबीबीजे गोलूवाला शाखा के ऑडिट इंचार्ज सुभाष भोभिया ने 5 जुलाई 2014 को अपने बैंक के उपशाखा प्रबंधक (कृषि) और बिहार के गया जिले के निवासी केके सिंह उर्फ कृष्ण कुमार सिंह पुत्र यदुमननंदन प्रसाद सिंह, शाखा प्रबंधक पटनानिवासी वैदेहीशरण, बैंक के कैशियर केसरीसिंहपुर निवासी सतीश शर्मा, बैंककर्मी गांव गुरसर मोडिया निवासी भंवरलाल अडिया और टिब्बी क्षेत्र के चक 14 एसएसडब्ल्यू निवासी जसपाल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसमें बताया गया कि इन बैंक अधिकारियों और कर्मियों ने वर्ष 2013 जून से अगस्त तक 70 खाताधारकों को किसान के रूप में बताते हुए उनको किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराने का दावा किया।
इन खाताधारकों से कर्जा देने के दौरान संपत्ति या भूमि के संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। बैंक अधिकारियों और कर्मियों ने अपने स्तर पर ही लिमिट बनाई और खाता खोलकर कर्जे के रूप में बैंक से 3 करोड़ 33 लाख रुपए का गबन कर लिया।जांच अधिकारी पुलिस उप अधीक्षक देवकिशन शर्मा ने जांच में पाया कि ऋण के नाम पर 70 बैंक खाताधारकों को किसान के रूप में दर्शाया गया और उनको किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अलग अलग तिथियों में विभिन्न कर्ज राशि आवंटन कागजों में कर दी। इससे एसबीबीजे को 3 करोड़ 42 लाख 31 हजार 916 रुपए को नुकसान पहुंचाया। इस घोटाले का तब पता चला जब बैंक की ऑडिट टीम ने गोलूवाला में लोन संबंधित दस्तावेज और खातों को खंगाला।
बुधवार शाम एसीबी कोर्ट ने तत्कालीन उपशाखा प्रबंधक केके सिंह उर्फ कृष्ण कुमार सिंह को दोषी मानते हुए विभिन्न धाराओं में सात साल कठोर कारावास व पचास हजार रुपए जुर्माना सुनाया।वहीं, तत्कालीन शाखा प्रबंधक विदेही शरण, बैंक कर्मी सतीशकुमार शर्मा, भंवरलाल व जसपाल सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। बैंककर्मियों की ओर से पैरवी अधिवक्ता नवीन पारीक, ओम रावल, आईपी सहारण आदि ने की।
Published on:
13 Dec 2017 09:24 pm
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